मौसम में बदलाव के साथ हवा की गुणवत्ता बनी चिंता का विषय, सेहत पर मंडराया खतरा

Edited By Kalash,Updated: 24 Oct, 2026 05:48 PM

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अक्तूबर महीने के आखिरी हफ्ते के दौरान मौसम में आ रहे बदलाव के साथ हवा की गुणवत्ता भी चिंता का विषय बनने लगी है।

गुरदासपुर (हरमन): अक्तूबर महीने के आखिरी हफ्ते के दौरान मौसम में आ रहे बदलाव के साथ हवा की गुणवत्ता भी चिंता का विषय बनने लगी है। दिन के समय तापमान 30 डिग्री सैल्सियस से ऊपर रह रहा है, जबकि रात को पारा नीचे आने से ठंडक महसूस होने लगी है। 22 अक्तूबर को गुरदासपुर में अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18.3 डिग्री सैल्सियस दर्ज किया गया। इस तरह दिन और रात के तापमान में करीब 13 डिग्री का अंतर रहा। दूसरी ओर 23 अक्तूबर को हवा की गुणवत्ता से संबंधित उपलब्ध आंकड़ों में एयर क्वालिटी इंडैक्स 131 दर्ज किया गया, जबकि हवा में बारीक धूल-कणों की मात्रा भी चिंता का विषय बनी हुई है।

हवा की गुणवत्ता में भी आ रहा उतार-चढ़ाव 

गुरदासपुर के वायु प्रदूषण संबंधी आंकड़ों में पिछले दिनों के दौरान काफी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। एक वायु-गुणवत्ता निगरानी प्लेटफॉर्म के रिकॉर्ड के अनुसार 19 अक्तूबर को शाम 4:31 बजे अमरीकी एयर क्वालिटी इंडैक्स 90 था, जो रात के समय बढ़ता हुआ 20 अक्तूबर की सुबह 9 बजे 206 तक पहुंच गया।

उसी दिन दोपहर 3:41 बजे यह आंकड़ा 118 दर्ज किया गया। इस तरह कुछ घंटों के भीतर हवा की गुणवत्ता के सूचकांक में बड़ा अंतर सामने आया। 23 अक्तूबर को उपलब्ध एक अन्य वायु-गुणवत्ता रिपोर्ट में ए.क्यू.आई. 131 दर्ज किया गया। इसी रिपोर्ट के मुताबिक हवा में पी.एम. 2.5 की मात्रा 49 माइक्रोग्राम और पी.एम. 10 की मात्रा 106 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर थी। पी.एम. 2.5 के बारीक कण सांस के जरिए फेफड़ों के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच सकते हैं, जबकि पी.एम. 10 के कण भी श्वसन प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं।

प्रदूषित हवा से सेहत को खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार हवा में प्रदूषकों की मात्रा बढ़ने से खांसी, गले में खराश, आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा और फेफड़ों की बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए प्रदूषित हवा अधिक मुश्किल पैदा कर सकती है। बच्चों और बुजुर्गों को भी इसका अधिक असर झेलना पड़ सकता है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से दिल और फेफड़ों की सेहत पर बुरा असर पड़ने का खतरा बढ़ता है।

पराली जलाने के सीजन में बढ़ी चिंता

धान की कटाई के सीजन के दौरान पराली जलाने से हवा में धुआं और बारीक धूल-कणों की मात्रा बढ़ सकती है। इसके अलावा वाहनों का धुआं, सड़कों की धूल और अन्य प्रदूषण स्रोत भी हवा की गुणवत्ता पर असर डालते हैं। मौसम में बदलाव के साथ हवा की गुणवत्ता में आने वाले उतार-चढ़ाव को देखते हुए प्रदूषण की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए लोगों को वायु प्रदूषण बढ़ने के समय बाहर भारी कसरत करने से बचना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। सांस लेने में तकलीफ बढ़ने या छाती में जकड़न महसूस होने पर डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। किसानों द्वारा पराली को आग लगाने की बजाय बेलर और अन्य कृषि मशीनरी से संभालना भी वायु प्रदूषण घटाने में मददगार हो सकता है।

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