150 परिवारों की रोजी-रोटी दांव पर, मंडरा रहा बड़ा खतरा! पढ़ें क्या है पूरा मामला

Edited By Urmila,Updated: 18 Oct, 2026 11:15 AM

150 families at risk of becoming homeless

पठानकोट में अमृतसर-पठानकोट-कुल्लू (APK) रोड पर मौजूद 47.41 एकड़ जमीन पर 31 साल पुराने कानूनी विवाद में माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, कई घरों और कमर्शियल जगहों पर बुलडोजर से हमला होने का खतरा है।

पठानकोट (हरजिंदर सिंह गोराया): पठानकोट में अमृतसर-पठानकोट-कुल्लू (APK) रोड पर मौजूद 47.41 एकड़ जमीन पर 31 साल पुराने कानूनी विवाद में माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, कई घरों और कमर्शियल जगहों पर बुलडोजर से हमला होने का खतरा है। इस कार्रवाई से करीब 150 परिवारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ने की संभावना है। प्रभावित इलाके में करीब 60 बिल्डिंग्स हैं, जिनमें करीब 40 रेजिडेंशियल बिल्डिंग्स, 14 वर्कशॉप्स, छह बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, एक गोदाम, एक मेडिकल लैब और एक मार्केट शामिल हैं।

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के सितंबर 2023 के फैसले को बरकरार रखते हुए, जमीन मालिकों के कानूनी वारिसों द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटीशन को खारिज कर दिया है। इस फैसले से पठानकोट इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के लिए एक्वायर की गई ज़मीन पर कब्ज़ा करने का रास्ता साफ़ हो गया है। ट्रस्ट अधिकारियों के मुताबिक, 1995 के नोटिफिकेशन के बाद हुए कंस्ट्रक्शन को गिराकर ज़मीन एक्वायर करने का प्रोसेस पूरा किया जाएगा।

इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने साल 1995 में APK रोड के एरिया-1 के पॉकेट C में 47.41 एकड़ ज़मीन एक्वायर करने का नोटिफिकेशन जारी किया था। इस ज़मीन को लेकर मालिकों और ट्रस्ट के बीच का झगड़ा कोर्ट तक पहुँच गया था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सितंबर 2023 में ट्रस्ट के हक में फैसला सुनाया। इसके बाद स्वर्गीय चौधरी काला सिंह के कानूनी वारिसों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया, लेकिन उन्हें वहाँ से भी राहत नहीं मिली।

इस बीच, प्रभावित दुकानदारों और निवासियों का कहना है कि वे पिछले 50 से 70 सालों से इस इलाके में रह रहे हैं और वर्कशॉप और दुकानों के ज़रिए अपने परिवार का गुज़ारा कर रहे हैं। अब प्रभावित परिवारों की नज़रें सरकार और इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के अगले कदम पर टिकी हैं। उनकी मांग है कि कोर्ट के फैसले का पालन करते हुए उनकी दशकों पुरानी रोजी-रोटी और रहने की जगह को ध्यान में रखते हुए सही पुनर्वास पक्का किया जाए।

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