Edited By Vatika,Updated: 23 Jan, 2026 04:59 PM

पंजाब सरकार द्वारा बॉर्डर एरिया में सेवाएं दे रहे अध्यापकों के लिए जारी किया
अमृतसर (दलजीत): पंजाब सरकार द्वारा बॉर्डर एरिया में सेवाएं दे रहे अध्यापकों के लिए जारी किया गया नया फरमान विवादों में घिर गया है। सरकार ने शर्त रखी है कि यदि कोई अध्यापक बॉर्डर एरिया छोड़ता है, तो उससे वित्तीय लाभ की राशि ब्याज सहित वसूल की जाएगी। इस फैसले से अध्यापक संगठनों में रोष फैल गया है।
क्या है सरकार का नया आदेश?
जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग ने अदालत के आदेशों का पालन करते हुए बॉर्डर एरिया में कार्यरत कर्मचारियों को एक अतिरिक्त इन्क्रीमेंट देने संबंधी पत्र जारी किया है। लेकिन इस लाभ के बदले सरकार ने एक ‘अंडरटेकिंग’ (सहमति पत्र) की शर्त लगा दी है। इसके तहत अध्यापक को पूरी नौकरी बॉर्डर एरिया में ही करनी होगी। यदि वह भविष्य में तबादला करवाकर इस क्षेत्र से बाहर जाता है, तो उसे अब तक लिए गए अतिरिक्त इन्क्रीमेंट की पूरी राशि ब्याज सहित सरकारी खजाने में वापस जमा करवानी होगी।
अध्यापकों को ‘बंधुआ मजदूर’ बनाने की कोशिश
डीटीएफ (डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट) पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष विक्रमदेव सिंह, जनरल सचिव महिंदर कौरियां और वित्त सचिव अश्वनी अवस्थी ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि सरकार बॉर्डर एरिया में काम करने के लिए अनुकूल माहौल बनाने में असफल रही है और अब ऐसी गैर-वाजिब शर्तें थोपकर अध्यापकों को ‘बंधुआ मजदूर’ बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तानाशाही फैसले के खिलाफ जल्द ही तीखा संघर्ष किया जाएगा।
टीचर होम और भत्ते देने की मांग
डेमोक्रेटिक मुलाजिम फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष जर्मनजीत सिंह और हरदीप टोडरपुर ने कहा कि बॉर्डर बेल्ट में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए अध्यापकों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। उन्होंने मांग की कि पुलिस लाइनों की तर्ज पर ‘टीचर होम’ बनाए जाएं, बड़े शहरों के बराबर हाउस रेंट दिया जाए और विशेष ‘बॉर्डर एरिया भत्ता’ लागू किया जाए। नेताओं ने कहा कि सिर्फ एक इन्क्रीमेंट के बदले ब्याज सहित वसूली की शर्त लगाना अध्यापकों के साथ क्रूर मजाक है।