पंजाब में रजिस्ट्री करवाने वालों के लिए खड़ी हुई मुसीबत! आवेदक परेशान

Edited By Kalash,Updated: 05 Feb, 2026 01:37 PM

property registry trouble

पंजाब सरकार द्वारा ईजी रजिस्ट्रेशन प्रणाली में लागू किए गए ‘फर्स्ट कम फर्स्ट आऊट’ (फीफो) सिस्टम ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

जालंधर (चोपड़ा): पंजाब सरकार द्वारा ईजी रजिस्ट्रेशन प्रणाली में लागू किए गए ‘फर्स्ट कम फर्स्ट आऊट’ (फीफो) सिस्टम ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन, पावर ऑफ अटॉर्नी, तबदील मलकियत सहित अन्य दस्तावेजों की ऑनलाइन अप्रूवल प्रक्रिया अब इतनी धीमी हो गई है कि सही कागजात होने के बावजूद आवेदकों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि गत दिन भी सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में दोपहर बाद तक आवेदकों की भारी भीड़ जमा रही।

उल्लेखनीय है कि फीफो सिस्टम के तहत नई व्यवस्था यह है कि जब तक पहली अप्वाइंटमेंट से जुड़ी फाइल की समूची प्रक्रिया कंप्लीट कर ऑनलाइन अप्रूवल पूरी नहीं हो जाती, तब तक पोर्टल पर अगली ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट ज्वाइंट सब-रजिस्ट्रार की आई.डी. में खुलती ही नहीं है। यदि किसी एक आवेदक की फाइल तकनीकी कारणों, दस्तावेजों की जांच या किसी आपत्ति, किसी गवाह, नंबरदार की एकाएक गैरमौजूदगी के चलते अटक जाती है, तो उसके बाद आने वाली सभी अप्वाइंटमैंट स्वतः ही रुकी रह जाती हैं। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जो कि अपनी बारी का इंतजार कर रहे होते हैं।

हालांकि ईजी रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर पहले ही दस्तावेज अपलोड किए जाते हैं और ज्वाइंट सब-रजिस्ट्रार स्तर पर ऑनलाइन जांच के बाद ही प्राथमिक अप्रूवल मिलता है। इसके बाद ही आवेदक ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट ले पाता है। ऐसे में अप्वाइंटमेंट मिलने के बाद भी यदि फाइल को अप्रूवल सीरियल में अटका दिया जाए तो यह व्यवस्था ‘ईजी’ के बजाय और अधिक जटिल बन जाती है।

नए फीफो सिस्टम के कारण आम लोग ही नहीं, बल्कि अर्जीनवीस (डीड राइटर), एडवोकेट और नंबरदार भी खासे परेशान नजर आ रहे हैं। कई आवेदक बार-बार सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। आवेदकों का कहना है कि पहले एक फाइल के साथ अगली फाइल पर भी वर्क शुरू हो जाता था और अप्रूवल सिस्टम में जिनके दस्तावेज पूरे होते थे, उनका काम समय पर निपट जाता था, लेकिन अब एक फाइल की देरी पूरे सिस्टम को रोक देती है। अर्जीनवीसों और एडवोकेट्स का मानना है कि सीरियल वाइज काम करने से न केवल काम की रफ्तार धीमी हुई है, बल्कि कार्यालयों में अनावश्यक भीड़ भी बढ़ रही है।

वहीं ज्वाइंट सब-रजिस्ट्रार-1 दमनवीर सिंह व मनमोहन सिंह और सब-रजिस्ट्रार-2 जगतार सिंह व रवनीत कौर का कहना है कि फीफो सिस्टम पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के उद्देश्य से लागू किया गया है, ताकि हर फाइल की क्रमवार और निष्पक्ष अप्रूवल से पारदर्शी और बिना किसी भेदभाव के लोगों के काम हो रहे है। अधिकारियों के अनुसार फीफो सिस्टम से किसी को भी अनुचित प्राथमिकता नहीं मिल पा रही है। हालांकि जनता की राय इससे अलग है। लोगों का कहना है कि इस फैसले ने ईजी रजिस्ट्री को और जटिल बना दिया है। आम लोगों ने सरकार से मांग की है कि या तो फीफो सिस्टम में ढील दी जाए या इस फैसले को वापस लेकर ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे पारदर्शिता भी बनी रहे और जनता को अनावश्यक परेशानियों का सामना भी न करना पड़े।

ऑनलाइन अप्वाइंटमैंट का टाइम-बाउंड सिस्टम भी बना जी का जंजाल

ईजी रजिस्ट्रेशन प्रणाली में लागू किए गए टाइम-बाउंड ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट सिस्टम ने भी आवेदकों के जी का जंजाल साबित हो रहा हैं। नए नियमों के तहत यदि किसी आवेदक की अप्वाइंटमेंट दोपहर 12 बजे की है, तो उसे हर हाल में समय पर पहुंच कर अपनी डाक्यूमैंट प्रक्रिया का शुरू कराना होता है और उसे 1 घंटा अधिक का टाइम बाऊंड किया गया है। अगर कोई आवेदक अप्वाइंटमैंट टाइम से 1 घंटा देरी से यानी कि 1.01 बजे ज्वाइंट सब रजिस्ट्रार के समक्ष पेश होता है तो देरी की स्थिति में सिस्टम स्वतः ही उस अप्वाइंटमैंट को पोर्टल में ज्वाईंट सब रजिस्ट्रार की आई.डी से लॉक कर देता है।

आवेदकों का कहना है कि कई बार ट्रैफिक जाम, तकनीकी दिक्कत, दस्तावेजों में मामूली संशोधन या स्टाफ की उपलब्धता न होने के कारण समय पर कार्यालय पहुंच पाना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में उनकी अप्वाइंटमैंट अपने आप निरस्त हो जाती है और उन्हें दोबारा पूरी प्रक्रिया से गुजरते हुए अपॉइंटमैंट री-शेड्यूल करनी पड़ती है। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि मानसिक और आर्थिक परेशानियां भी बढ़ जाती हैं। लोगों की मांग है कि टाइम-बाउंड सिस्टम में लचीलापन लाया जाए, ताकि मामूली देरी पर अप्वाइंटमैंट लॉक न हो और आवेदकों को बार-बार रीशेड्यूलिंग की परेशानी से बचाया जा सके।

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