सरकार बनने के बाद मजीठिया को जमानत आसानी से मिल गई थी, सरकार ने अदालत में विरोध नहीं किया था: कुंवर विजय प्रताप ने घेरी AAP सरकार

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 04 Feb, 2026 09:15 PM

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बिक्रम सिंह मजीठिया को लेकर उठ रहे सवालों पर कुंवर विजय प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर लाइव होकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि वह मजीठिया की सिफारिश करते हैं, लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह किसी भी...

चंडीगढ़।
बिक्रम सिंह मजीठिया को लेकर उठ रहे सवालों पर कुंवर विजय प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर लाइव होकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन पर यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि वह मजीठिया की सिफारिश करते हैं, लेकिन उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह किसी भी तरह की सिफारिश नहीं करते।

कुंवर विजय प्रताप ने कहा कि मजीठिया के साथ उनका मतभेद आज का नहीं, बल्कि जन्म-जन्मांतर का है और यह मतभेद निजी नहीं बल्कि विचारधारात्मक है। उन्होंने बताया कि मजीठिया की गिरफ्तारी के समय भी उन्होंने अपने फेसबुक पेज के माध्यम से यह बात सार्वजनिक रूप से कही थी। हालांकि, मजीठिया की फैमिली के साथ हुई कथित बदसलूकी पर उन्होंने टिप्पणी जरूर की थी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सात महीने पहले जब मजीठिया पर विजीलैंस द्वारा आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था, जिस पर उन्होंने कहा था कि यह केस मजीठिया पर लागू नहीं होता। वहीं ड्रग्स केस को लेकर उन पर मजीठिया का पक्ष लेने के आरोप लगाए गए, जबकि यह मामला कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में दर्ज हुआ था।

कुंवर विजय प्रताप ने कहा कि 2022 में चुनावों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने मजीठिया को अस्थायी राहत दी थी और चुनाव संपन्न होने के बाद 24 फरवरी 2022 को मजीठिया ने कोर्ट में सरेंडर किया। उन्होंने यह भी कहा कि जब भगवंत मान मुख्यमंत्री बने, उस समय मजीठिया ड्रग्स केस में जेल में थे, लेकिन 10 अगस्त 2022 को ड्रग्स केस में मजीठिया को जमानत मिल गई। उस समय मौजूदा सरकार ने अदालत में ना तो रिमांड मांगा ना ही जमानत का विरोध किया। यह जमानत भगवंत मान सरकार के तंत्र के जरिए करवाई गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यह जमानत किन परिस्थितियों में दी गई और इसका जवाब मुख्यमंत्री भगवंत मान या पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को देना चाहिए।

कुंवर विजय प्रताप ने आगे कहा कि इसके बाद जब मजीठिया ने मुख्यमंत्री मान के खिलाफ बयानबाजी शुरू की तो उसके बाद निजी रंजिश के तहत उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज कर लिया गया, जो बनता ही नहीं था, जबकि इससे पहले ड्रग्स और बरगाड़ी जैसे मामलों में सरकार द्वारा समझौता कर लिया गया।

उन्होंने मजीठिया के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय जनता पर अत्याचार हुए, जिसकी जिम्मेदारी मजीठिया की बनती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस दौर में अत्याचार करने वाले कुछ लोग अब वर्तमान सरकार के करीबी बन चुके हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि वे लोग अब सही हो गए हैं, तो मजीठिया ही गलत कैसे ठहराए जा सकते हैं।

कुंवर विजय प्रताप ने कहा कि अगर मान सरकार वास्तव में नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना चाहती थी, तो ड्रग्स केस में रिमांड ली जा सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और सांसद राघव चड्ढा से मांग की कि वे सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करें कि ड्रग्स केस में मजीठिया को जमानत कैसे मिली। और अगर सच में इस केस में कुछ करके दिखाना चाहते हैं तो अभी समय है, जरूर करके दिखाएं।

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