मिडल स्कूलों में पोस्ट खत्म करने की तैयारी? शिक्षा विभाग के फैसले पर भड़की मास्टर कैडर यूनियन

Edited By Vatika,Updated: 14 Apr, 2026 01:46 PM

plans to abolish posts in middle schools

पंजाब में शिक्षा विभाग द्वारा मिडल स्कूलों में अध्यापकों की तैनाती को लेकर लिए गए फैसले

लुधियाना: पंजाब में शिक्षा विभाग द्वारा मिडल स्कूलों में अध्यापकों की तैनाती को लेकर लिए गए फैसले पर विवाद खड़ा हो गया है। मास्टर कैडर यूनियन पंजाब ने आरोप लगाया है कि विभाग मिडल स्कूलों से मास्टर कैडर की पोस्ट खत्म करने की तैयारी में है। यूनियन के राज्य उपाध्यक्ष जगजीत सिंह साहनेवाल और जिला लुधियाना के महासचिव गुरप्रीत सिंह दोराहा ने प्रेस बयान जारी कर बताया कि डायरेक्टरेट ऑफ स्कूल एजुकेशन (सेकेंडरी) पंजाब द्वारा 10 अप्रैल 2026 को जारी पत्र के तहत सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर अध्यापकों को अन्य स्कूलों में अस्थायी रूप से शिफ्ट किया जाए।

2 अध्यापक पढ़ाएंगे 9 विषय
जारी आदेश के अनुसार, मिडल स्कूलों में अब केवल 2 अध्यापक ही पंजाबी, हिंदी, गणित, विज्ञान, सामाजिक शिक्षा, अंग्रेजी, शारीरिक शिक्षा, ड्राइंग, कंप्यूटर और एग्रीकल्चर जैसे विषय पढ़ाएंगे।यूनियन नेताओं का कहना है कि यह फैसला शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। उनका आरोप है कि सरकार प्राइमरी स्कूलों की तर्ज पर मिडल स्कूलों में भी सीमित अध्यापकों से सभी विषय पढ़वाने का “तुगलकी फरमान” लागू कर रही है।

विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर शिक्षक तैनाती 
पत्र के अनुसार:
30 विद्यार्थियों तक — 2 अध्यापक
60 विद्यार्थियों तक — 3 अध्यापक
90 विद्यार्थियों तक — 4 अध्यापक

इसके अलावा अधिक अध्यापकों को अन्य स्कूलों में अस्थायी तौर पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

यूनियन ने उठाए सवाल
यूनियन नेताओं ने सवाल उठाया कि एक विषय का विशेषज्ञ अध्यापक अन्य विषयों जैसे गणित, विज्ञान, अंग्रेजी या सामाजिक शिक्षा कैसे पढ़ा पाएगा। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ेगा। उनका कहना है कि पहले ही मिडल स्कूलों में चार विषय अध्यापक रखने का फैसला किया गया था, लेकिन अब इसे घटाकर दो तक सीमित करना शिक्षा की गुणवत्ता को कमजोर करेगा।

भर्ती की मांग और चेतावनी
मास्टर कैडर यूनियन ने सरकार से मांग की है कि:
स्कूलों में खाली पदों को तुरंत भरा जाए
मिडल स्कूलों से संबंधित यह आदेश वापस लिया जाए
हर विषय के लिए अलग अध्यापक नियुक्त किए जाएं

यूनियन का कहना है कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में आंदोलन भी किया जा सकता है।

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