Edited By Kalash,Updated: 25 Oct, 2026 02:57 PM

कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट, नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों के मुताबिक ईंटों के भट्टों में ईंट बनाने के लिए ईंधन के तौर पर 30 फीसदी धान की पराली की पेलेट्स का इस्तेमाल करना जरूरी है।
बठिंडा (वर्मा): कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट, नई दिल्ली के दिशा-निर्देशों के मुताबिक ईंटों के भट्टों में ईंट बनाने के लिए ईंधन के तौर पर 30 फीसदी धान की पराली की पेलेट्स का इस्तेमाल करना जरूरी है। इन आदेशों को लागू करने के लिए ईंटों के भट्टों के लिए संबंधित पेलेट्स बनाने वाली फैक्ट्रियों से पेलेट्स की लगातार सप्लाई यकीनी बनाना जरूरी है। यह बात डिप्टी कमिश्नर बठिंडा राजेश धीमान ने यहां जिले के ईंट भट्टों के मालिकों के साथ एक मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि जिले में 143 ईंट भट्टे चल रहे हैं, जो इस सीजन में करीब 20,000 टन धान की पराली के पेलेट्स का इस्तेमाल करेंगे।
उन्होंने बताया कि ईंट बनाने के लिए पेलेट्स का इस्तेमाल कोयले के साथ ईंधन के रूप में किया जाता है। इससे न सिर्फ खेतों में पराली जलाने की समस्या को रोकने में मदद मिलती है बल्कि इसका सही इस्तेमाल भी यकीनी बनता है। इसके साथ ही पेलेट्स को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करना कोयले को जलाने के मुकाबले पर्यावरण के लिए ज्यादा अनुकूल माना जाता है। डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि ईंट भट्टों के 5 महीने के कार्यकाल के दौरान करीब 20,000 टन धान की पराली के पेलेट्स की खपत होगी।
उन्होंने भट्टा मालिकों से अपील की है कि वे अपने आस-पास की पेलेट बनाने वाली यूनिट्स के साथ एक MoU साइन करें ताकि पेलेट्स की लगातार सप्लाई बनी रहे। इस मौके पर पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की एक्सईएन रूबी सिद्धू, डी.एफ.एस.सी. गुरतार सिंह, डी.एफ.एस.ओ. हर्षित मेहता, ईंट भट्टों के मालिक और दूसरे लोग मौजूद थे।
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