लुधियाना में 9 साल के बच्चे की हत्या: गला रेतकर झाड़ियों में फेंका शव, परिवार काटता रहा थानों के चक्कर

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 07 Feb, 2026 07:17 PM

nine year old boy murdered in ludhiana

लुधियाना में एक 9 वर्षीय बच्चे की निर्मम हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने शनिवार शाम को कासाबाद गांव के पास झाड़ियों में बच्चे का शव बरामद किया है। मृतक की पहचान अमन (9) के रूप में हुई है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में कहा है कि बच्चे की...

लुधियाना (अनिल) : लुधियाना में एक 9 वर्षीय बच्चे की निर्मम हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने शनिवार शाम को कासाबाद गांव के पास झाड़ियों में बच्चे का शव बरामद किया है। मृतक की पहचान अमन (9) के रूप में हुई है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में कहा है कि बच्चे की गला रेतकर हत्या की गई है।

जानकारी अनुसार अमन तीन दिन पहले घर के बाहर खेलते समय अचानक गायब हो गया था। परिजन उसे ढूंढते रहे, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। परिवार ने अमन की तलाश में गांव के आसपास और आस-पास के इलाकों में भी काफी खोजबीन की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।

शनिवार शाम को कासाबाद गांव के पास झाड़ियों में एक संदिग्ध स्थिति में शव देखा गया और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट विवरण सामने आएगा, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट में बच्चे की गला रेतकर हत्या की बात सामने आई है। वहीं बच्चे का शव बरामद होने के बाद परिवार में मातम छाया छा गया है तथा परिवार का रो रोकर बुरा हाल है। 

इस पूरे मामले में हैरानीजनक बात यह सामने आई है कि जब परिवार अपने बच्चे की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाने थाना सलेम टाबरी गया तो उन्हें यह कह टाल दिया गया कि यह उनका एरिया नहीं है। इसके बाद परिवार बस्ती जोधेवाल थाने गए, लेकिन वहां पर भी उनका एरिया न बताकर टाल दिया गया। इसके बाद परिवार थाना मेहरबान पहुंचा, वहां पर भी थाने वालों ने एरिया न होने की बात कही। इसके बाद परिवार थाना लाडोवाल थाने गया, लेकिन वहां पर भी यह कह कर इन्कार कर दिया गया कि यह उनका एरिया नहीं है। और इस तरह एक के बाद एक थाने के चक्कर लगाने के बाद आखिर में बच्चे का शव आज शाम कासाबाद के पास झाड़ियों बरामद किया गया। और अंत में यह एरिया थाना सलेम टाबरी थाने का ही निकला। इस सबसे पता चलता है कि पुलिस कैसे पीड़ित परिवार को ऐसे ही घुमाती रही। अगर पुलिस ने पूरी इमानदारी व मुस्तैदी से परिवार की मदद की होती तो आज शायद यह नन्ही जान बच सकती थी।

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