17 साल से पेंशन के लिए भटक रहे 80 साल के बुजुर्ग को High Court से बड़ी राहत

Edited By Vatika,Updated: 21 Sep, 2026 11:30 AM

major relief from the high court for an 80 year old man who had been struggling

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 17 साल से अपनी दिवंगत पत्नी की पेंशन के लिए सरकारी दफ्तरों और बैंक के

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 17 साल से अपनी दिवंगत पत्नी की पेंशन के लिए सरकारी दफ्तरों और बैंक के चक्कर काट रहे 80 वर्षीय जगदीश राज अरोड़ा को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने जिला शिक्षा अधिकारी (डी.ई.ओ.), जिला खजाना अधिकारी (डी.टी.ओ.) और बैंक अधिकारियों की तनख्वाह रोकने के आदेश दिए हैं। अदालत ने अधिकारियों और बैंक के बीच जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को अपने जायज हक के लिए भटकने को मजबूर किया गया।

अदालत ने निर्देश दिया कि जब तक पेंशन के बकाये का प्रभावी तरीके से निपटारा नहीं हो जाता, तब तक संबंधित अधिकारी और बैंक अधिकारी अदालत की पूर्व अनुमति के बिना अपनी तनख्वाह नहीं निकाल सकेंगे। जगदीश राज अरोड़ा ने वर्ष 2023 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ब्लॉक प्राइमरी शिक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त अपनी पत्नी सुदर्शन कुमारी की पेंशन के बकाये का भुगतान करने की मांग की थी। लगातार प्रयासों के बावजूद पेंशन वितरण प्राधिकरण और बैंक एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे, जिसके चलते बकाया राशि का भुगतान नहीं हो सका।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि पेंशन के बकाये पर याचिकाकर्ता के अधिकार को लेकर कोई विवाद नहीं है। गुरदासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने जवाब में कहा कि पंजाब के अकाउंटेंट जनरल कार्यालय की ओर से 24 सितंबर 2012 को जिला खजाना अधिकारी को पत्र जारी किया गया था, लेकिन बैंक ऑफ इंडिया ने इसे लागू नहीं किया। वहीं, बैंक की ओर से कहा गया कि जिला खजाना अधिकारी द्वारा कुछ आवश्यक कार्रवाई पूरी नहीं किए जाने के कारण बकाया पेंशन जारी नहीं की जा सकी। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस कुलदीप तिवारी ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव में होने के बावजूद अपने जायज हक के लिए भटकता रहा।

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