पंजाब में बड़े प्रोजेक्ट को केंद्र सरकार की मंजूरी, 40 साल पुरानी मांग हुई पूरी

Edited By Kalash,Updated: 01 Oct, 2026 02:44 PM

central government approves project in punjab

खरड़ के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले  'महाराजा अज सरोवर' के कायाकल्प और रीडेवलपमेंट के लिए केंद्र सरकार द्वारा 93.94 करोड़ रुपये की रकम मंजूर किए जाने से पिछले करीब 40 सालों से चल रहे प्रयासों को बड़ी सफलता मिली है।

खरड़ (रणबीर): खरड़ के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले  'महाराजा अज सरोवर' के कायाकल्प और रीडेवलपमेंट के लिए केंद्र सरकार द्वारा 93.94 करोड़ रुपये की रकम मंजूर किए जाने से पिछले करीब 40 सालों से चल रहे प्रयासों को बड़ी सफलता मिली है। इस प्रोजेक्ट की मंजूरी से 'महाराजा अज सरोवर' के धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और टूरिज्म के लिहाज से विकसित करने का रास्ता साफ हो गया है।  श्री राम मंदिर अज सरोवर विकास कमेटी के पदाधिकारियों ने केंद्र सरकार द्वारा प्रोजेक्ट को मंजूरी दिए जाने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की मंजूरी नहीं है, बल्कि खरड़ के लोगों के चार दशकों के संघर्ष, सेवा, समर्पण और विश्वास की बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि अब इस ऐतिहासिक सरोवर को वर्ल्ड क्लास टूरिज्म सेंटर और पंजाब के मुख्य प्रवेश द्वार के तौर पर डेवलप करने की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं। उन्होंने पंजाब के गवर्नर गुलाब चंद कटारिया और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का शुक्रिया अदा किया और कहा कि उनके सहयोग और कोशिशों से इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिली है। उन्होंने केंद्रीय टूरिज्म मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और केंद्र सरकार का भी शुक्रिया अदा किया।

उन्होंने बताया कि गवर्नर गुलाब चंद कटारिया 26 मार्च 2026 को श्री राम मंदिर में मूर्ति स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हुए थे। इस मौके पर तालाब के विकास के लिए जरूरी कोशिशें करने का भरोसा भी दिया गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के निर्देश पर पंजाब सरकार के अधिकारियों ने एक डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करके केंद्रीय टूरिज्म मंत्रालय को भेज दी। कई स्टेज की बातचीत और एक्शन के बाद अब प्रोजेक्ट को फाइनल मंजूरी मिल गई है।

133 कनाल में फैला है ऐतिहासिक सरोवर 

कमेटी के सदस्यों ने बताया कि करीब 133 कनाल एरिया में फैले 'महाराजा अज सरोवर' का ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक नजरिए से खास महत्व है। उनके मुताबिक यह जगह भगवान श्री राम चंद्र जी के दादा महाराजा अज से जुड़ी है। ब्रिटिश काल में यहां से हिंदू, बौद्ध और जैन परंपराओं से जुड़े जरूरी आर्कियोलॉजिकल अवशेष मिलने का भी जिक्र है, जिसके बाद तत्कालीन प्रशासन ने उनके संरक्षण के लिए खास निर्देश जारी किए थे।

1986 से सरोवर की संभाल के लिए चल रही थी कोशिशें 

उन्होंने बताया कि साल 1986 में इस सरोवर के संरक्षण और विकास के लिए लोगों को साथ लेकर एक अभियान शुरू किया गया था। लोगों के सहयोग से सरोवर के घाटों का जीर्णोद्धार किया गया और श्री राम भवन का निर्माण किया गया। इसके बाद स्थानीय भक्तों की मदद से भगवान श्री राम और उनके पूर्वजों को समर्पित एक मंदिर भी बनाया गया। 

सरोवर में पानी की बहाली भी जरूरी 

कमेटी के सदस्यों ने उम्मीद जताई कि विकास प्रोजेक्ट के साथ-साथ सरोवर में फिर जरूरी मात्रा में पानी उपलब्ध करवाने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आस-पास तेजी से शहरीकरण होने की वजह से पानी के कुदरती सोर्स पर असर पड़ा है। अगर तालाब में फिर से पानी भर दिया जाए और इसका असली इकोलॉजिकल रूप वापस लाया जाए, तो यह जगह धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ पर्यावरण और टूरिज्म के मामले में देश की खास जगहों में शामिल हो सकती है।

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