Ludhiana सब्जी मंडी में ई-नीलामी के बाद संकट में आढ़ती, बुरा फंसा Project

Edited By Vatika,Updated: 29 Sep, 2025 03:21 PM

ludhiana sabji mandi

बहादुर रोड स्थित होलसेल सब्जी मंडी में पंजाब मंडी बोर्ड द्वारा 15 से 30 जून तक कराई गई

लुधियाना (राम): बहादुर रोड स्थित होलसेल सब्जी मंडी में पंजाब मंडी बोर्ड द्वारा 15 से 30 जून तक कराई गई ई-नीलामी के बाद दुकानों और प्लॉट खरीदने वाले आढ़ती अब चार महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अपनी दुकानों का कब्जा नहीं पा सके हैं। न तो उन्हें दुकानों की निशानदेही मिली है और न ही अलॉटमैंट। इस स्थिति ने खरीदारों में बेचैनी और चिंता बढ़ा दी है। विकास गोयल (विक्की) ने कहा कि हमने चार महीने पहले भुगतान किया और अब तक हमारी दुकानों का कोई पता नहीं है। हमारी पूंजी इस प्रोजेक्ट में फंसी हुई है और हमें हर महीने भारी ब्याज देना पड़ रहा है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो हम मजबूर होकर हाईकोर्ट जाएंगे।

मनोज कुमार (मोनू) ने कहा कि यह स्थिति हमारी आर्थिक योजना को पूरी तरह प्रभावित कर रही है। सरकार से अपील है कि या तो हमें कब्जा दिलाया जाए या हमारी जमा राशि ब्याज सहित लौटाई जाए। कुशल सिंह ने कहा कि हमारी मेहनत और निवेश दोनों जोखिम में हैं। मंडी बोर्ड ने पहले तो ई-निलामी करवाई, लेकिन अब दुकानों की अलॉटमेंट रोक दी है। यह न्यायसंगत नहीं है।” सुमेश कुमार (रिंकू) ने कहा कि हमने अपने बैंक और मार्केट से ऋण लेकर यह राशि जमा कराई थी। अब समय पर दुकानों का कब्जा नहीं मिलने से हमारी आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है।” हरजोत नागपाल ने कहा कि आखिरकार हम सभी मिलकर हाईकोर्ट जाने की योजना बना रहे हैं। यह हमारी आखिरी कोशिश होगी कि हमारी जमा पूंजी सुरक्षित रहे।

ताजा घटनाक्रम के अनुसार, रविवार को आढ़तियों ने मंडी में बैठक की और निर्णय लिया कि यदि जुलाई तक दुकानों का कब्जा नहीं मिला, तो वे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। सभी ने इस मामले में एकजुटता दिखाते हुए रणनीति तय की है। यह मामला लुधियाना की होलसेल सब्जी मंडी में 15 से 30 जून 2025 के बीच हुई ई-निलामी से जुड़ा है। खरीदारों को अब तक उनकी दुकानों का कब्जा नहीं मिला। इससे पहले मंडी बोर्ड और मार्केट कमेटी के दौरे में खुलासा हुआ कि नक्शे में दुकानों के लिए जगह ही नहीं थी और जो जमीन दुकानों के लिए काटी गई, वह पार्किंग और पेट्रोल पंप के लिए रिजर्व थी।

मंडी में हाल ही में मंडी बोर्ड, मार्केट कमेटी और सिविल विभाग के अधिकारियों ने दौरा कर जांच की। पता चला कि जिन जगहों पर दुकानें और प्लॉट काटे गए हैं, वह जमीन असल नक्शे में वाहनों की पार्किंग और पेट्रोल पंप के लिए रिजर्व थी। लुधियाना सब्जी मंडी और फ्रूट मंडी आढ़ती एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, नक्शे में दुकानों के लिए कोई जगह ही नहीं थी। खरीदारों ने हर दुकान के लिए लगभग 25 लाख रुपये एडवांस जमा कराए हैं, जबकि एक दुकान की कुल कीमत लगभग एक करोड़ रुपये है। अब कब्जा न मिलने के कारण खरीदारों पर भारी ब्याज का बोझ बढ़ गया है।

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