Edited By Kamini,Updated: 02 Feb, 2026 05:18 PM

23 जुलाई 2023 को सतलुज नदी में बहकर पाकिस्तान पहुंचे हरविंदर सिंह पुत्र मुख्तियार सिंह निवासी परजियां बिहारीपुर (लुधियाना) और रतनपाल पुत्र महिंदर सिंह निवासी खैहरा मुस्तरका, थाना मेहतपुर (जालंधर) को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद रिहा...
सिधवां बेट (चाहल): 23 जुलाई 2023 को सतलुज नदी में बहकर पाकिस्तान पहुंचे हरविंदर सिंह पुत्र मुख्तियार सिंह निवासी परजियां बिहारीपुर (लुधियाना) और रतनपाल पुत्र महिंदर सिंह निवासी खैहरा मुस्तरका, थाना मेहतपुर (जालंधर) को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद रिहा कर दिया गया है। लेकिन उनके चेहरों पर पाकिस्तान में झेले गए अत्याचारों का डर आज भी साफ नजर आता है।
परिजनों और गांव के सरपंच जसवीर सिंह जस्सा की मौजूदगी में अपनी आपबीती सुनाते हुए हरविंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने पाकिस्तान में 32 महीने नर्क जैसी जिंदगी बिताई। उन्होंने कहा कि पाक रेंजर्स द्वारा उन्हें कई बार ऐसे अमानवीय अत्याचार दिए गए कि उन्हें ईश्वर से मौत की दुआ तक मांगनी पड़ी।
भारतीय जासूस होने का बयान देने का बनाया गया दबाव
हरविंदर के अनुसार पाक रेंजर्स ने उन्हें लगातार 28 दिनों तक अंधेरी कालकोठरी में बंद रखा और उन पर भारतीय जासूस होने का बयान देने का दबाव बनाया गया। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब अपने बच्चों के पास पंजाब लौटने की उम्मीद पूरी तरह खत्म हो गई थी। लेकिन परिवार, गांव की पंचायत और लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर के लगातार प्रयासों के चलते आज वे सुरक्षित अपने बच्चों के बीच लौट पाए हैं। उन्होंने आगे बताया कि इसी सदमे के दौरान उनके पिता मुख्तियार सिंह का निधन हो गया और वे अपने पिता की अंतिम रस्मों में भी शामिल नहीं हो सके।
सजा पूरी होने के बाद भी नहीं किया गया रिहा
हरविंदर ने बताया कि जुलाई 2023 में राज्य में आई बाढ़ के दौरान वे फिरोजपुर के पास गांव चांदीवाल में अपने मामा की बेटी परमजीत कौर की मदद के लिए अपने रिश्तेदार रतनपाल के साथ गए थे। जब वे अपनी बहन के पशुओं को नदी से बाहर निकाल रहे थे, तभी अचानक राजोगट्टी बांध टूट गया और तेज बहाव में बहकर वे पाकिस्तान पहुंच गए। वहां पाकिस्तानी रेंजर्स ने उन्हें पकड़कर अलग-अलग एजेंसियों के हवाले कर दिया। पहले उन पर भारतीय जासूस होने का आरोप लगाया गया और बाद में जबरन सीमा पार करने का आरोप लगा कर थाना गंडा सिंह में मुकदमा दर्ज किया गया। 31 जनवरी 2024 को कसूर की सेशन अदालत ने उन्हें 13 महीने की सजा सुनाई और उन्हें लाहौर की लखपत राय जेल भेज दिया गया। उन्होंने बताया कि सजा पूरी होने के बाद भी “भारत सरकार आपको लेने के लिए तैयार नहीं है” का बहाना बनाकर 7 महीने तक उन्हें रिहा नहीं किया गया।
जेल में भारतीय कैदी गंभीर बीमारियों से पीड़ित
हरविंदर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिहाई के आदेश के बाद जेल कर्मचारियों का व्यवहार और अधिक खराब हो गया और उन्हें दिन में केवल एक बार खाना दिया जाने लगा। मार्च 2025 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उन्हें हर बुधवार परिवार के साथ 10 मिनट फोन पर बात करने की अनुमति मिली थी। उन्होंने बताया कि उनके साथ 20 अन्य भारतीय कैदी भी थे, जिन्हें जेल में अलग सेल में रखा गया था। इनमें से अधिकतर कैदी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं, इसके बावजूद उनसे रोजाना काम करवाया जाता है।
अब परेशान न किया जाए - पत्नी
इस दौरान हरविंदर की पत्नी सिकंदर कौर ने पति की रिहाई पर खुशी जताते हुए पंजाब पुलिस और भारतीय एजेंसियों पर लगातार परेशान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की अदालत से रिहाई के बाद परिवार को सौंपने से पहले भारतीय एजेंसियों ने 5 घंटे तक गहन पूछताछ की। इसके बावजूद अब बार-बार अलग-अलग अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए बुलाया जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं दोबारा उनके पति पर कोई झूठा मामला दर्ज न कर दिया जाए।
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