Edited By Kalash,Updated: 04 Jul, 2026 02:42 PM

स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत चल रहे फूड एंड ड्रग विभाग में अमृतसर जिले के भीतर कुछ अधिकारियों की लंबे समय से एक ही सीट पर तैनाती ने सरकारी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमृतसर (दलजीत): स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत चल रहे फूड एंड ड्रग विभाग में अमृतसर जिले के भीतर कुछ अधिकारियों की लंबे समय से एक ही सीट पर तैनाती ने सरकारी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये अधिकारी न केवल 3 साल के नियमित कार्यकाल के नियम को नजर-अंदाज कर रहे हैं बल्कि तबादला होने के बावजूद कुछ ही समय में दोबारा अमृतसर वापसी करके पहले वाली सीटें ही संभाल लेते हैं। इस पूरे मामले ने भ्रष्टाचार, सिफारिश और विभागीय मिलीभगत के आरोपों को जन्म दे दिया है।
जानकारी के अनुसार सरकारी सर्विस नियमों के मुताबिक किसी भी अधिकारी को एक ही पोस्ट या सीट पर 3 वर्षों से अधिक समय के लिए तैनात नहीं किया जा सकता। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि प्रशासन में पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी तरह की अनैतिक गतिविधि को रोका जा सके लेकिन अमृतसर के फूड एंड ड्रग विभाग में इस नियम का खुलेआम उल्लंघन होने के आरोप लग रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ अधिकारी ऐसे हैं जो पिछले कई सालों से लगातार अमृतसर में ही जमे हुए हैं। जब भी उनका तबादला होता है वे कुछ समय के लिए दूसरे जिलों में तैनात रहते हैं लेकिन फिर जल्द ही वापस अमृतसर आकर वही पुरानी सीट संभाल लेते हैं। इस तरह की लगातार वापसी ने यह संदेह पैदा किया है कि यह सब कुछ उच्च स्तरीय सिफारिशों या अंदरूनी सांझ से ही संभव हो रहा है।
खास बात यह भी सामने आई है कि कुछ अधिकारी अपनी पोजीशन को मजबूत करने के लिए दूसरे अधिकारियों के खिलाफ झूठी शिकायतें तक करवाते हैं। इससे न केवल विभाग का माहौल प्रभावित हो रहा है बल्कि ईमानदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ रहा है। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि शिकायतों के आधार पर तबादले हो जाते हैं और कुछ समय बाद शिकायत करने वाला अधिकारी खुद ही उस सीट पर कब्जा कर लेता है।
अधिकारी व्हाट्सएप कॉल या मैसेजिंग ऐप्स का करते हैं प्रयोग
फूड विभाग के एक अधिकारी के बारे में विशेष रूप से चर्चा है कि वह अपनी सरकारी कार्रवाइयों को लेकर बहुत सावधानी बरतता है। बताया जाता है कि वह सीधे टैलीफोन पर बात करने की बजाय व्हाट्सएप कॉल या मैसेजिंग ऐप्स के जरिए ही संपर्क करता है ताकि उसकी बातों का कोई आसान रिकॉर्ड न रहे। व्यापारियों और दुकानदारों से भी इसी तरीके से संपर्क बनाया जाता है जिसके कारण कई तरह के संदेह पैदा हो रहे हैं। ड्रग विभाग में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। यहां भी कुछ अधिकारी ऐसे हैं जो लंबे समय से एक ही जगह पर टिके हुए हैं और व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क करने को प्राथमिकता देते हैं। इस तरीके को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सरकारी पारदर्शिता के नियमों के अनुकूल है या नहीं।
जवाब मांगते सवाल
-यदि सरकार के पास नियम हैं तो उनका पालन क्यों नहीं किया जा रहा?
-क्या अमृतसर में अन्य योग्य अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं?
-कुछ खास अधिकारियों को ही प्राथमिकता क्यों दी जा रही है?
डिब्बी‘एक ही सीट पर लंबे समय तक तैनाती भ्रष्टाचार को जन्म दे सकती है’
प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि एक ही सीट पर लंबे समय तक तैनाती भ्रष्टाचार को जन्म दे सकती है। जब कोई अधिकारी एक ही जगह पर लंबे समय तक काम करता है तो उसके स्थानीय व्यापारियों और हितधारकों के साथ निजी संबंध बन जाते हैं जो अक्सर नियमों के उल्लंघन की ओर ले जाते हैं। इसलिए सरकार द्वारा बनाया गया तीन वर्षों का नियम बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।
लोगों व व्यापारी वर्ग में नाराजगी
स्थानीय लोगों और व्यापारी वर्ग में भी इस मामले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि अगर एक ही अधिकारी सालों तक एक ही जगह पर रहेगा तो निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद नहीं की जा सकती। कई लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ अधिकारियों के काम करने के तरीके पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं लेकिन कोई उचित कार्रवाई नहीं हुई।
विजीलैंस विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग
इस मामले को लेकर अब विजीलैंस विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। सीनियर एडवोकेट साई किरन परिंजा ने कहा कि अगर विजीलैंस द्वारा इस मामले की गहराई से जांच की जाए तो कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं। इससे न केवल संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होगी बल्कि विभाग में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
सरकार के लिए यह मामला एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। अगर नियमों का पालन नहीं हो रहा है तो यह सरकारी प्रणाली की कार्यक्षमता पर सीधा सवाल है। लोगों को उम्मीद है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेगी और नियमों का पालन सुनिश्चित करेगी। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस मामले पर सख्त कदम उठाती है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।
अधिकारियों के तबादले नियमों के अनुसार होते हैं : कमिश्नर
इस संबंध में जब ड्रग एंड फूड विभाग की कमिश्नर आई.ए.एस. कंवलप्रीत कौर बराड़ से बातचीत की गई, तो उन्होंने कहा कि अधिकारियों के तबादले नियमों के अनुसार होते हैं और ऊपर से होते हैं।
डॉक्टर मनजीत सिंह रटोल बने जिला स्वास्थ्य अधिकारी
स्वास्थ्य विभाग द्वारा सहायक फूड कमिश्नर रजिंदर पाल सिंह का तबादला जालंधर कर दिया गया है। फिलहाल उनकी शक्तियां किसी को नहीं दी गई हैं लेकिन विभाग द्वारा डॉक्टर मनजीत सिंह रटोल को जिला स्वास्थ्य अधिकारी लगाया गया है। डॉक्टर रटोल इससे पहले सरकारी अस्पताल मानांवाला में सीनियर मैडीकल अधिकारी के पद पर तैनात थे। कयास लगाए जा रहे हैं कि विभाग द्वारा जल्द ही फूड विभाग की शक्तियां डी.एच.ओ. डॉक्टर रटोल को दी जा सकती हैं।
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