पंजाब में किसानों के कर्ज लेने पर नई शर्तें लागू! अब गिरवी रखनी होगी जमीन

Edited By Kalash,Updated: 11 Oct, 2026 11:56 AM

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सहकारिता विभाग द्वारा खेतीबाड़ी सहकारी सभाओं से कर्ज लेने वाले किसानों के लिए जो नई पॉलिसी लागू की गई है उसमें किसानों के लिए जो शर्ते हैं वह बेहद सख्त हैं।

माछीवाड़ा साहिब (टक्कर): सहकारिता विभाग द्वारा खेतीबाड़ी सहकारी सभाओं से कर्ज लेने वाले किसानों के लिए जो नई पॉलिसी लागू की गई है उसमें किसानों के लिए जो शर्ते हैं वह बेहद सख्त हैं। सहकारिता विभाग द्वारा खेतीबाड़ी सभाओं को जो पत्र भेजा गया है कि उसमें पहले किसानों को कर्ज लेने के लिए अपनी जमीन गिरवी नहीं रखनी पड़ती थी पर अब अगर किसान 2 लाख रुपये से ज्यादा का कर्ज लेगा तो उसे जमीन गिरवी रखनी होगी और फर्द पर लिमिट लोन की एंट्री दर्ज होगी। इसके अलावा पहले किसानों को 1 लाख रुपये का लिमिट लोन लेने के लिए सहकारिता विभाग को हिस्से के तौर पर 3 हजार रुपये जमा करवाने पड़ते थे पर अब इसे दोगुना कर छोटे किसानों के लिए 6 हजार रुपये और बड़े किसानों के लिए 9 हजार रुपये की  शर्त लागू कर दी गई है।  

सहकारिता विभाग के पहले के नियमों में कर्ज लेने वाले किसानों को सब्सिडी दी जाती थी और ब्याज दर भी कम थी पर अब जो नए नियम लागू हुए हैं उसमें 3 लाख रुपये से अधिक कर्ज लेने वाले किसानों को निजी बैंकों से भी अधिक 11 परसेंट ब्याज देना होगा। इसमें एक और शर्त लागू की गई है कि अगर छोटा किसान जिसने दूसरे बैंक से भी 3 लाख रुपये से ज्यादा सब्सिडी वाला कर्ज लिया हुआ है पर उसे खेतीबाड़ी सहकारी सभा से कर्ज लेते समय सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा और वह एक जगह पर ही सब्सिडी का लाभ ले सकेगा।       

नई पॉलिसी के अनुसार बनेंगे सभी किसानों के लिमिट लोन 

खेतीबाड़ी विभाग से संबंधित अधिकारियों ने बताया कि सहकारिता विभाग ने आदेश दिया है कि जिन पुराने किसानों ने लिमिट लोन लिया है, अब उनके नए लिमिट लोन नई पॉलिसी के हिसाब से तैयार किए जाएं। अगर किसी नए किसान को खेतीबाड़ी सभा से लोन लेना है, तो उसके लिए भी नई पॉलिसी लागू होगी। जानकारी के मुताबिक खेतीबाड़ी सभा में 2 लाख रुपये तक का लोन लेने वाले किसान बहुत कम हैं, जबकि ज्यादातर किसानों ने इससे ज्यादा लोन ले रखा है। नई पॉलिसी के तहत इन सभी किसानों पर न सिर्फ एक्स्ट्रा ब्याज और एक्स्ट्रा हिस्सों का बोझ पड़ेगा, बल्कि अब उनकी जमीन भी खेतीबाड़ी विभाग के पास गिरवी रखी जाएगी, जबकि पहले यह शर्त नहीं थी।

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