Edited By Vatika,Updated: 08 Oct, 2026 10:55 AM

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर किसी लाइसेंस धारक को हथियार लाइसेंस जारी ...
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर किसी लाइसेंस धारक को हथियार लाइसेंस जारी करते समय उसकी पात्रता और उसकी जान-माल को खतरे को ध्यान में रखा गया था, तो बाद में वह व्यक्ति अपनी जान और संपत्ति को ‘तत्काल खतरे’ में होने का सबूत पेश करने में असफल रहता है, तो सिर्फ इसी आधार पर हथियार लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने हथियार लाइसेंस रद्द करने और कानूनी अपील खारिज करने के आदेशों को रद्द करते हुए मामला जींद के जिला मजिस्ट्रेट के पास दोबारा भेज दिया है। अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट को सभी संबंधित पहलुओं पर विचार करने और याचिकाकर्ता को सुनवाई का उचित मौका देने के बाद कानून के अनुसार नए सिरे से फैसला लेने के निर्देश दिए हैं। यह फैसला जस्टिस कुलदीप तिवारी की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। हाईकोर्ट में जींद के जिला मजिस्ट्रेट के 21 मार्च 2023 के आदेश को चुनौती दी गई थी। इस आदेश में याचिकाकर्ता का हथियार लाइसेंस कथित दुरुपयोग, गैर-जिम्मेदाराना और लापरवाही भरे व्यवहार तथा उसकी जान-माल को तत्काल खतरा नहीं होने के आधार पर रद्द कर दिया गया था। इसके बाद याचिकाकर्ता ने इस फैसले के खिलाफ कानूनी अपील की, जिसे कमिश्नर ने 26 जून 2024 को खारिज कर दिया था।
लाइसेंस जारी करते समय ‘तत्काल खतरे’ पर विचार जरूरी
जिला मजिस्ट्रेट के आदेश की जांच करते हुए जस्टिस तिवारी ने पाया कि यह मुख्य रूप से दो आधारों पर लिया गया था। पहला, याचिकाकर्ता अपनी जान और संपत्ति को किसी खतरे का ऐसा सबूत पेश नहीं कर सका, जिसके लिए लाइसेंसी हथियार रखना जरूरी हो। दूसरा, लाइसेंसी हथियार के कथित दुरुपयोग को लेकर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता की जान और संपत्ति को खतरे का मुद्दा हथियार लाइसेंस जारी करते समय संबंधित अथॉरिटी को देखना चाहिए था। पात्र पाए जाने के बाद ही उसे हथियार लाइसेंस जारी किया गया था। जस्टिस तिवारी ने कहा कि बाद में याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाया कि उसकी जान और संपत्ति को कोई तत्काल खतरा था, तो केवल इस आधार पर उसका हथियार लाइसेंस रद्द करना पर्याप्त नहीं होगा। खासकर तब, जब उसकी पात्रता पर विचार करने के बाद पहले ही उसे लाइसेंस जारी किया जा चुका था। अदालत ने माना कि जिला मजिस्ट्रेट ने इस पहलू पर सही तरीके से विचार नहीं किया।
कथित दुरुपयोग के मामले में मुकदमा अभी लंबित
याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता ने अपना लाइसेंसी हथियार किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दिया था। उस व्यक्ति ने कथित तौर पर एक शादी समारोह में खुलेआम हवा में गोली चलाई थी। इस घटना का वीडियो भी बनाया गया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। राज्य पक्ष ने कहा कि युवाओं में शादी समारोहों के दौरान हथियारों के दुरुपयोग का रुझान बढ़ रहा है। ऐसे मामलों को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई जरूरी है। इस पर जस्टिस तिवारी ने कहा कि यह भी तथ्य है कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। संबंधित एफआईआर का मुकदमा अभी लंबित है और याचिकाकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अभियोजन पक्ष की ओर से सबूतों के जरिए साबित किया जाना बाकी है। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल भविष्य में हथियार लाइसेंस की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं करेगा और किसी अन्य व्यक्ति को अपने लाइसेंसी हथियार का इस्तेमाल करने की अनुमति भी नहीं देगा।