Edited By Kamini,Updated: 14 Oct, 2026 02:50 PM

लोगों को जल्द ही घूमने-फिरने और इको टूरिज्म के लिए एक नया ठिकाना मिलने जा रहा है।
पंजाब डेस्क : लोगों को जल्द ही घूमने-फिरने और इको टूरिज्म के लिए एक नया ठिकाना मिलने जा रहा है। जानकारी के अनुसर, चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 स्थित सुखना चो रिजर्व फॉरेस्ट में 35 एकड़ जमीन पर सिटी फॉरेस्ट विकसित किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को प्रशासन की मंजूरी मिल चुकी है और इसके लिए 13.72 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद की अध्यक्षता वाली कमेटी ने परियोजना के बजट को मंजूरी दी है।
सिटी फॉरेस्ट में लोगों के मनोरंजन के साथ पर्यावरण संरक्षण और इको टूरिज्म को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। यहां 100 सीटों वाला ऑडिटोरियम, ओपन एयर थिएटर, नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर, बर्ड वॉच टावर और साइकिल ट्रैक जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र के खराब लैंडस्केप को सुधारना और लोगों को प्रकृति, जैव विविधता तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।
इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट को सौंपी निर्माण की जिम्मेदारी
इस प्रोजेक्ट को फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के डिपॉजिट वर्क के रूप में तैयार किया जाएगा, जबकि निर्माण की जिम्मेदारी इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट को सौंपी गई है। परियोजना का लैंडस्केप प्लान तैयार हो चुका है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। टेंडर आवंटित होने के बाद इसे एक साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासन की ओर से परियोजना में पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक वातावरण को नुकसान पहुंचाए बिना लोगों के लिए मनोरंजन और घूमने-फिरने की सुविधाएं विकसित करना है।
2022 में खाली करवाई गई जमीन पर विकसित होगा सिटी फॉरेस्ट
मिली जानकारी के मुताबिक, साल 2022 में सुखना चो के डाउनस्ट्रीम में इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित कॉलोनी नंबर-4 की जमीन खाली करवाई गई थी। अब इसी क्षेत्र के लैंडस्केप में सुधार करने और इसे हरित क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है।
बारिश के पानी के संरक्षण और जैव विविधता पर रहेगा फोकस
सिटी फॉरेस्ट में पर्यावरण शिक्षा के लिए भी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना के तहत बारिश के पानी को सहेजने, प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने और क्षेत्र की जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा, पूरे प्रोजेक्ट में पारिस्थितिक बहाली यानी इकोलॉजिकल रेस्टोरेशन को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि क्षेत्र के प्राकृतिक स्वरूप को बेहतर बनाया जा सके।
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