Edited By Urmila,Updated: 12 Apr, 2026 09:13 AM

सैंट्रल बोर्ड ऑफ़ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) ने देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी मुकम्मल कर ली है।
लुधियाना (विक्की): सैंट्रल बोर्ड ऑफ़ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) ने देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी मुकम्मल कर ली है। बोर्ड ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (एन.सी.एफ.) 2023 की सिफारिशों को सख्ती से लागू करने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अब कक्षा छठी से '3 भाषाओं का फॉर्मूला' (आर1, आर2, आर3) अनिवार्य होगा।
बोर्ड ने स्कूलों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे नई पाठ्य पुस्तकों की उपलब्धता का इंतजार न करें। जब तक आधिकारिक किताबें मार्कीट में नहीं आतीं, तब तक स्कूल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री या अन्य सहायक किताबों के जरिए तीसरी भाषा की पढ़ाई तुरंत शुरू करवाएं। इसके साथ ही, स्कूलों को अपने द्वारा चुनी गई तीसरी भाषा की पूरी जानकारी बोर्ड के 'OASIS' पोर्टल पर भी अपडेट करनी होगी।
9वीं और 10वीं के चयन पर पड़ेगा सीधा असर
इस नए आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि छात्र कक्षा 9वीं और 10वीं में केवल उन्हीं भाषाओं का चुनाव कर सकेंगे जिन्हें स्कूल ने कक्षा 6 में 'तीसरी भाषा' के तौर पर पढ़ाया होगा। यानी विद्यार्थियों के भविष्य के भाषाई विकल्प अब पूरी तरह से कक्षा-6 की पसंद पर निर्भर करेंगे। सी.बी.एस.ई. के क्षेत्रीय कार्यालय इस आदेश के पालन की कड़ी निगरानी करेंगे। बोर्ड का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच भाषाई दक्षता, संवाद कौशल और सांस्कृतिक समझ को बढ़ाना है ताकि वे वैश्विक स्तर पर खुद को तैयार कर सकें।
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