अध्यापकों के DA को लेकर बड़ी राहत, 9 सालों बाद प्रशासन ने लिया फैसला

Edited By Urmila,Updated: 24 Aug, 2026 10:35 AM

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सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट), चंडीगढ़ बेंच ने यू.टी. शिक्षा विभाग को अपने कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले टीचर्स को 2 महीने के अंदर महंगाई भत्ते (डी.ए.) का बकाया देने और इस बारे में कैट रजिस्ट्री में एक कम्प्लायंस एफिडेविट फाइल करने का...

चंडीगढ़ (अंकुर): सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट), चंडीगढ़ बेंच ने यू.टी. शिक्षा विभाग को अपने कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले टीचर्स को 2 महीने के अंदर महंगाई भत्ते (डी.ए.) का बकाया देने और इस बारे में कैट रजिस्ट्री में एक कम्प्लायंस एफिडेविट फाइल करने का निर्देश दिया है। कैट का यह समयबद्ध निर्देश ऐसे समय में आया है जब चंडीगढ़ एजुकेशन डिपार्टमेंट ने आखिरकार मानहानि की कार्रवाई दौरान 11 अगस्त 2026 को 2018 में कैट द्वारा तीन मूल आवेदनों (ओ.एज) में दिए गए फैसलों की पालना करते हुए  300 से अधिक आवेदनकारों को उनकी नियुक्ति की शुरुआती तारीखों से लागू बेसिक पे के साथ डी.ए. का बकाया देने का फैसला किया है।

एप्लीकेंट्स के वकील ने तर्क दिया कि 2017 और 2018 में, अलग-अलग कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले टी.जी./ई.टी.टी./पी.टी.आई./डी.पी.ई./एन.टी.टी. टीचर्स द्वारा ओ.एज. दायर की गई हैं।  इनमें चंडीगढ़ प्रशासन के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसके तहत उनकी शुरुआती नियुक्ति से मूल वेतन के साथ डीए देने का दावा 10 फरवरी, 2016 के मेमो के जरिए खारिज कर दिया गया था, हालांकि यह लाभ 1 जनवरी, 2016 से दिया गया था।

इस दावे के लिए, 31 मार्च, 2011 के वंदना जैन के मामले में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण, चंडीगढ़ बेंच के फैसले और सुप्रीम कोर्ट सहित अन्य अदालती फैसलों का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया था कि अनुबंधित शिक्षकों को समय-समय पर संशोधित मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता (डीए) पाने का अधिकार है। हालांकि 2018 के ओ.एज. में इसे मंजूरी देने वाले 10 फरवरी, 2016 के मेमो को रद्द कर दिया गया था, लेकिन चंडीगढ़ प्रशासन ने इसका लाभ देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि वंदना जैन के फैसले की न्यायिक समीक्षा पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में चल रही है। इस मामले को चंडीगढ़ प्रशासन ने सी.डब्ल्यू.पी. नंबर 19280 ऑफ 2011 के जरिए चुनौती दी थी।

आवेदनकारों के वकील ने ट्रिब्यूनल को बताया कि वंदना जैन मामले में दायर रिट को बाद में 31 अगस्त, 2024 को खारिज कर दिया गया और सुप्रीम कोर्ट ने भी 16 जुलाई को इसे बरकरार रखा। वकील ने आगे दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई हार जाने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने स्कूल शिक्षा डायरेक्टोरेट ने 11 अगस्त, 2026 को दफ्तरी आदेश जारी करके सभी स्कूल प्रमुखों को तीनों ओ.एज. के 310 आवेदनकारों को बनते बकाय जारी करने की मंजूरी दे दी।  

यह ऑर्डर कैट, चंडीगढ़ के सामने चल रही अदालती मानहानि पटीशनों दौरान भी रिकॉर्ड में रखा गया था। चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा 2018 में सुनाए गए फैसलों के पूरी तरह से पालना करते हुए बकाया जारी करने के फैसले को ध्यान में रखते कैट ने बकाया जारी करने के लिए समयबद्ध निर्देश जारी किए। मानहानि पिटीशनों का निपटारा करते हुए कैट ने आवेदनकारों/पिटीशनर्स को यह आज़ादी भी दी कि अगर तय समय के अंदर ज़रूरी एक्शन नहीं लिया जाता है, तो वे मानहानि पिटीशन को फिर से खोलने की मांग कर सकते हैं।

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