Edited By Urmila,Updated: 07 Feb, 2026 12:49 PM

पंजाब में ‘आप’ सरकार द्वारा जहां रोजाना नशों को खत्म करने की बयानबाजी की जाती है वहीं पर दूसरी ओर नगर निगम में एक गंभीर मामला सामने आया है।
जालंधर (विशेष): पंजाब में ‘आप’ सरकार द्वारा जहां रोजाना नशों को खत्म करने की बयानबाजी की जाती है वहीं पर दूसरी ओर नगर निगम में एक गंभीर मामला सामने आया है। नगर निगम के कमिश्नर संदीप ऋषि ने एक जूनियर कर्मचारी को नगर निगम में महत्वपूर्ण सीट पर तैनात कर दिया है। इसे लेकर कर्मचारियों में व्यापक हलचल मची हुई है क्योंकि पिछले वर्ष ही एक नशा तस्कर के साथ एस.टी.एफ. ने इस कर्मचारी को गिरफ्तार किया था। उस नशा तस्कर से पुलिस को ग्लॉक पिस्तौल और भारी मात्रा में ड्रग मनी भी बरामद हुई थी।
एस.टी.एफ. जालंधर रेंज की टीम ने गत वर्ष 20 सितम्बर को ही एक बड़ी कार्रवाई करते हुए तस्करी सिंडीकेट का पर्दाफाश किया था, जिसमें कुल 10 गिरफ्तारियां हुई थी। स्वयं पंजाब पुलिस ने दावा किया था कि इस रैकेट में नगर निगम का एक जूनियर कर्मचारी भी शामिल था और बकायदा उसकी तस्वीरें भी समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई थी।
अब नगर निगम कमिश्नर ने किस आधार पर उक्त कर्मचारी को पुन: महत्वपूर्ण पद पर तैनात कर दिया है इसका खुलासा तो वह स्वयं ही कर सकते हैं परन्तु कर्मचारी वर्ग ने ‘आप’ सरकार की नशा विरोधी लहर पर प्रश्नचिन्ह लगाना शुरू कर दिया है। कर्मचारियों ने बताया कि यह मामला कमिश्नर के ध्यान में है परन्तु वह यही जवाब दे रहे हैं कि राजनीतिक दबाव के कारण यह कदम उठाया गया है। अब यह राजनीतिक दबाव क्या स्थानीय था या फिर मंत्री स्तर का इसके बारे में अलग-अलग चर्चाएं सुनने को मिल रही हैं।
नगर निगम के कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि एस.टी.एफ. द्वारा गिरफ्तार हुए उक्त कर्मचारी को पद से हटाया जाए। जब तक उसे अदालत से क्लीनचिट नहीं मिलती है तब तक उसकी तैनाती किसी भी पद पर नहीं की जानी चाहिए। कमिश्नर ने 6 फरवरी 2026 को आदेश नंबर 3909 जारी किया था।
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