Ludhiana में दिल दहला देने वाली घटना, 16 वर्षीय छात्रा ने उठाया खौफनाक कदम, जानें पूरा मामला

Edited By VANSH Sharma,Updated: 28 May, 2026 09:28 PM

16 year old student dies after allegedly drinking acid in ludhiana

शहर में एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है।

लुधियाना (गणेश / सचिन) : शहर में एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां आठवीं कक्षा में असफल होने से मानसिक रूप से परेशान 16 वर्षीय किशोरी ने कथित तौर पर तेजाब पीकर आत्महत्या कर ली। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

मृतका की पहचान मुस्कान कुमारी के रूप में हुई है, जो काराबारा के नानक नगर क्षेत्र की रहने वाली थी। परिजनों के अनुसार मुस्कान पढ़ाई में सामान्य छात्रा थी, लेकिन कुछ दिन पहले घोषित हुए आठवीं कक्षा के परीक्षा परिणाम में असफल होने के बाद से वह काफी तनाव में रहने लगी थी। परिवार का कहना है कि रिजल्ट आने के बाद वह गुमसुम रहने लगी थी और किसी से ज्यादा बातचीत भी नहीं कर रही थी।

जानकारी के मुताबिक, 26 मई की शाम करीब 7 बजे मुस्कान ने घर में रखा तेजाब पी लिया। कुछ ही देर में उसकी तबीयत बिगड़ गई और हालत गंभीर हो गई। परिजन तुरंत उसे सी.एम.सी. अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया। हालांकि उसकी हालत लगातार नाजुक बनी रही और वीरवार को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।

घटना की सूचना मिलते ही थाना दरेसी पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल के शवगृह में पोस्टमार्टम के लिए रखवा दिया है। जांच अधिकारी ए.एस.आई. सुखविंदर सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम शुक्रवार सुबह करवाया जाएगा, जिसके बाद नियमानुसार अगली कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के अनुसार मामले में धारा 174 बीएनएसएस के तहत कार्रवाई की जा रही है और हर पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच जारी है।

हालांकि यह पहला मामला नहीं है, जब परीक्षा परिणाम से निराश होकर किसी छात्र या छात्रा ने ऐसा खौफनाक कदम उठाया हो। आजकल कई बच्चे परीक्षा परिणाम को लेकर मानसिक दबाव में आ जाते हैं। असफलता का डर और समाज की अपेक्षाएं कई बार बच्चों को अंदर से तोड़ देती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़कर उनकी मानसिक स्थिति को समझना चाहिए, ताकि कोई बच्चा ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर न हो।

यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि परीक्षा में असफल होना जिंदगी की हार नहीं है। बच्चों को समझाने और उनका मनोबल बढ़ाने की जरूरत है, ताकि वे किसी भी परिस्थिति में खुद को अकेला महसूस न करें।

अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!