सिटी में बिना पॉल्यूशन सर्टीफिकेट के दौड़ रहे ज्यादातर ऑटोज

Edited By Sunita sarangal,Updated: 12 Nov, 2019 10:00 AM

most autos running without pollution certificate

शहर में चल रहे 50 प्रतिशत ऑटो वालों के पास मान्यता नहीं, 25 प्रतिशत ऑटोज 15 साल से भी पुराने

जालंधर(वरुण): वातावरण प्रदूषित करने में ऑटो वाले भी पीछे नहीं हैं। शहर में दौड़ रहे ज्यादातर ऑटोज बिना पॉल्यूशन सर्टीफिकेट के घूम रहे हैं। इतना ही नहीं, इन ऑटो में डीजल के साथ कैरोसिन मिक्स किया जा रहा है, जो वातावरण के लिए और भी खतरनाक है। प्रशासन ने 15 साल पुराने ऑटोज को अवैध घोषित किया हुआ है, लेकिन 25 प्रतिशत ऑटोज ऐसे हैं जो शहर में 15 साल से भी पुराने हैं और बिना रोक-टोक के चल रहे हैं। 50 प्रतिशत ऑटोज अवैध हैं। 

आंकड़ों की मानें तो सिटी में 6 हजार के लगभग ऑटो मान्य हैं, लेकिन हालात ऐसे हैं कि इस समय सिटी में 14,000 के करीब ऑटो दौड़ रहे हैं, जबकि 8 हजार के करीब ऑटो देहात इलाके से सिटी में एंट्री कर रहे हैं। कुछ समय पहले ही प्रशासन ने अवैध ऑटो वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी की थी, जिसमें कहा गया था कि देहात इलाके वाले ऑटोज सिटी में दाखिल नहीं होंगे, लेकिन प्रशासन व ट्रैफिक पुलिस की लापरवाही के कारण अवैध ऑटो पर कार्रवाई नहीं हुई। इसके अलावा नाके पर दोपहिया वाहनों को रोक कर बिना दस्तावेज के चालान करने वाली ट्रैफिक पुलिस भी आंखें मूंदे बैठी हुई है। बड़े-बड़े नाकों से इस तरह के ऑटो बिना चैकिंग के जाने दिए जाते हैं। अगर ट्रैफिक पुलिस सख्ती करे और बिना पॉल्यूशन सर्टीफिकेट के ऑटोज पर शिकंजा कसे तो वातावरण को प्रदूषित होने से काफी हद तक बचाया जा सकता है।

सबसे ज्यादा नौजवान व बुजुर्गों पर होता है असर
डाक्टरों की मानें तो डीजल व कैरोसिन का धुआं ज्यादातर बुजुर्ग व नौजवानों के लिए खतरनाक है। इस धुएं से सांस की तकलीफ के अलावा खांसी व रेशा जैसी बीमारियां भी होती हैं और ऐसे हालातों में दवाई भी असर नहीं करती।

डी.सी.पी. ट्रैफिक नरेश डोगरा का कहना है कि मामला काफी गंभीर है, लेकिन अब मेरे ध्यान में है। मंगलवार से ही बिना पॉल्यूशन सर्टीफिकेट वाले ऑटोज के चालान किए जाएंगे। देहाती इलाके से सिटी में एंट्री करने वाले ऑटोज को बंद किया जाएगा। अगर कोई ऑटो अवैध निकला तो उसे बंद किया जाएगा।

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