बिना एसोसिएट प्रोफेसर बने ही मिल गई प्रिंसिपल की Approval, प्रोफेसर घई ने किए खुलासे

Edited By Sunita sarangal,Updated: 22 Apr, 2026 03:20 PM

without being assistant professor got approval of being principal

पंजाब सरकार के हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट से एक ऐसा बहुत चिंताजनक मामला सामने आया है जिसने सभी को हैरान कर दिया है।

पंजाब डैस्क : पंजाब सरकार के हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट से एक ऐसा बहुत चिंताजनक मामला सामने आया है जिसने सभी को हैरान कर दिया है। जानकारी के अनुसार एक व्यक्ति को एडेड कॉलेज में प्रिंसिपल के पद के लिए तब अप्रूव कर दिया गया, जब वह यूनिवर्सिटी पैनल के जरिए एसोसिएट प्रोफेसर भी नहीं बना था। हैरानी की बात यह है कि एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर उसकी अप्रूवल हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट ने प्रिंसिपल बनने के करीब दस महीने बाद दी।

इस मामले पर रोशनी डालते हुए एसोसिएशन ऑफ यूनाइटेड कॉलेज टीचर्स, पंजाब और चंडीगढ़ (AUCT) के प्रधान प्रोफेसर तरुण घई ने कहा कि संबंधित व्यक्ति को पंजाब सरकार के हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट ने 1 जून, 2020 को प्रिंसिपल के तौर पर अप्रूव किया था, जबकि एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर उसकी अप्रूवल 24 मार्च, 2021 को जारी की गई थी। प्रोफेसर घई ने कहा कि यह कार्रवाई यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के 2010 और 2018 के नियमों का साफ उल्लंघन है, जिसमें साफ कहा गया है कि प्रिंसिपल बनने से पहले किसी भी व्यक्ति को यूनिवर्सिटी से अप्रूव्ड सिलेक्शन पैनल के जरिए एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर अपॉइंट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस व्यक्ति को 24 मार्च, 2021 को जो अप्रूवल दिया गया था, वह भी पंजाब सरकार के डिपार्टमेंट ने दिया था, जबकि उसके पास आज भी संबंधित यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर का अप्रूवल नहीं है।

प्रोफेसर घई ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की और कहा कि ऐसे कदमों से न सिर्फ नेशनल लेवल पर पंजाब सरकार की इमेज खराब हुई है, बल्कि पंजाब सरकार का हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट भी मजाक का पात्र बन गया है। उन्होंने आगे कहा कि इस मामले से जुड़े सभी फैक्ट्स डायरेक्टर, हायर एजुकेशन, पंजाब को पहले ही सौंप दिए गए हैं। डिपार्टमेंट की क्रेडिबिलिटी और इंटीग्रिटी बनाए रखने के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि डायरेक्टर, हायर एजुकेशन, पंजाब इस मामले में तुरंत और सख्त एक्शन लें। इसके लिए उस नाकाबिल आदमी को प्रिंसिपल की पोस्ट से हटाया जाए और उस कॉलेज को पिछले 6 साल के लाखों रुपये की रिकवरी दी जाए और विभाग के उन कर्मचारियों को तुरंत सस्पेंड किया जाए जिन्होंने ये दस्तावेज देखे बिना यह अप्रूवल दिया है।

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