CP लुधियाना को समन करने की कोशिश पर HC की फटकार, पढ़ें पूरा मामला

Edited By Vatika,Updated: 04 Feb, 2026 01:58 PM

swapan sharma high court summons

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को बिना ठोस कारण वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को डिफेंस

चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को बिना ठोस कारण वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को डिफेंस गवाह के रूप में समन करने की कोशिश पर सख्त रुख अपनाते हुए, जालंधर अदालत द्वारा एनडीपीएस मामले में लुधियाना के कमिश्नर ऑफ पुलिस स्वप्न शर्मा को समन करने के आदेश पर स्टे लगा दिया। यह मामला माननीय जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने सुना। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल में देरी पैदा करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को बेवजह अदालतों में घसीटना न्यायिक प्रक्रिया का गलत उपयोग है, जो खासकर समय-सीमित एनडीपीएस ट्रायल में बिलकुल भी स्वीकार्य नहीं है।
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हाईकोर्ट की टिप्पणी 
सुनवाई के दौरान बेंच ने खुली अदालत में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “लुधियाना के कमिश्नर ऑफ पुलिस को अदालत में बुलाने की आखिर जरूरत क्या है? क्या सिर्फ CCTV रिकॉर्ड हासिल करने के लिए?” बेंच ने इस बात पर भी गंभीर हैरानी जताई कि जालंधर की ट्रायल कोर्ट ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति के लिए जमानती वारंट तक जारी कर दिए। जब डिफेंस पक्ष कोई ठोस कारण पेश नहीं कर सका, तो हाईकोर्ट ने कहा कि जिन अधिकारियों का जांच में कोई हिस्सा नहीं है और जो गवाह सूची में भी शामिल नहीं हैं, उन्हें केवल प्रसिद्धि हासिल करने या ट्रायल को लटकाने के लिए समन नहीं किया जा सकता।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का विकल्प
हाईकोर्ट ने यह भी बताया कि सी.पी. लुधियाना ने कानून-व्यवस्था और अन्य गंभीर जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हाजिरी की अनुमति मांगी थी, जिस पर जालंधर अदालत को गंभीरता से विचार करना चाहिए था। इसके बजाय अदालत ने हाजिरी पर जोर दिया, जो न्यायिक विवेक के अनुकूल नहीं है।

मीडिया कवरेज पर फटकार
हाईकोर्ट ने समन आदेश के बाद हुई मीडिया रिपोर्टिंग पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि अधूरी जानकारी और अटकलों के आधार पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की छवि खराब करने की कोशिश की गई, जो मीडिया की पारदर्शिता और समाज के विश्वास के लिए हानिकारक है।

क्या है केस
उक्त एनडीपीएस केस एक सफल और सुव्यवस्थित एंटी-ड्रग कार्रवाई से संबंधित है। मार्च 2024 में जालंधर कमिश्नरेट पुलिस द्वारा दो महीने लंबी कार्रवाई के बाद एक अंतरराष्ट्रीय नशा तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया गया था। इस दौरान 9 आरोपी गिरफ्तार किए गए , 22 किलो अफीम बरामद हुई, नशे की कमाई से जुड़े लगभग 9 करोड़ रुपये के लेन-देन वाले 30 बैंक खाते जाम किए गए। इस कार्रवाई में झारखंड से अफीम उगाने वाले आरोपी अभी राम की गिरफ्तारी हुई, जबकि कोरियर नेटवर्क, हवाला ऑपरेटर्स और दलालों की भूमिका भी सामने आई। जांच के दौरान 6 कस्टम अधिकारियों से जुड़े गंभीर तथ्य भी उजागर हुए, जिसमें दिल्ली से चार कस्टम कर्मचारियों की गिरफ्तारी शामिल है। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी, बरामदगी और पूरी सप्लाई चेन के टूटने से स्पष्ट है कि ऐसे मामलों में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को समन करने का कोई तार्किक आधार नहीं है। इन तथ्यों के मद्देनज़र, हाईकोर्ट ने जालंधर अदालत के समन आदेश पर स्टे लगाते हुए CP लुधियाना को तुरंत राहत दी और स्पष्ट संदेश दिया कि न्यायिक प्रक्रिया को न तो वरिष्ठ अधिकारियों को परेशान करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और न ही प्रभावशाली एंटी-ड्रग कार्रवाइयों को कमजोर करने के लिए।

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