2 वरिष्ठ IAS अधिकारियों का निलंबन मामला, सुखविंदर रंधावा ने आम आदमी पार्टी पर की तीखी प्रतिक्रिया

Edited By Urmila,Updated: 09 Feb, 2026 10:33 AM

suspension case of 2 senior ias officers

पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने आम आदमी पार्टी की भगवंत सिंह मान सरकार पर दो वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारियों के निलंबन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया की है।

जालंधर/ चंडीगढ़  (विशेष) : पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने आम आदमी पार्टी की भगवंत सिंह मान सरकार पर दो वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारियों के निलंबन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया की है। रंधावा ने इस कार्रवाई को प्रशासनिक अनुशासन के बजाय डराने और दबाव बनाने की कोशिश करार दिया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर जारी अपने बयान में रंधावा ने कहा कि दो वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारियों को एक रहस्यमयी और टैलीग्राफिक आदेश के जरिए निलंबित करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अधिकारियों ने कोई गंभीर अवैधता की है तो सरकार को चाहिए कि वह चार्जशीट सार्वजनिक करे और सच्चाई जनता के सामने रखे।

रंधावा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार ऐसा नहीं करती, तो इससे यह संदेश जाता है कि संबंधित अधिकारियों ने किसी अवैध आदेश को मानने से इनकार किया, और इसी वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासनिक स्वतंत्रता के लिए बेहद खतरनाक बताया।

पूर्व उप-मुख्यमंत्री ने पंजाब आई.ए.एस. ऑफिसर्स एसोसिएशन की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन इस पूरे मामले में पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रही है, जबकि कई अधिकारी लंबे समय से बिना पोस्टिंग के रखे गए हैं, जो प्रशासनिक नियमों और स्थापित परंपराओं का खुला उल्लंघन है। रंधावा ने आगे आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार दिल्ली से रिमोट कंट्रोल के जरिए चलाई जा रही है और जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सरकार की बौखलाहट और हताशा साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि अफसरशाही पर दबाव बनाकर सरकार अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों को डराने-धमकाने की नीति नहीं छोड़ी, तो इसका सीधा असर शासन व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि सरकार पारदर्शिता अपनाए, नियमों के अनुसार कार्रवाई करे और ईमानदार अधिकारियों को राजनीतिक बदले की भावना का शिकार न बनाए।

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