Edited By Urmila,Updated: 24 Jun, 2026 04:53 PM

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा ने रवनीत सिंह बिट्टू को दी गई तथाकथित धार्मिक सजा पर कड़ा ऐतराज जताया है।
पंजाब डेस्क : राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा ने रवनीत सिंह बिट्टू को दी गई तथाकथित धार्मिक सजा पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने पंजाब स्टेट शेड्यूल कास्ट कमीशन के फैसले को गैर-संवैधानिक करार दिया।
इकबाल सिंह लालपुरा ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत गठित किसी भी आयोग के पास केवल जांच करने और सरकार को सिफारिशें भेजने का अधिकार होता है। आयोग किसी भी व्यक्ति को धार्मिक या किसी अन्य प्रकार की सजा देने का अधिकार नहीं रखता। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग अदालत नहीं है, बल्कि एक संवैधानिक संस्था है जिसकी सीमित शक्तियां हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि रवनीत सिंह बिट्टू को धार्मिक सजा देना आयोग की शक्तियों का दुरुपयोग है। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया के सामने इस तरह की कार्यवाही को “मीडिया ट्रायल” बताया और कहा कि इससे न केवल संबंधित व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचा है, बल्कि आयोग की विश्वसनीयता भी कमजोर हुई है।
इकबाल सिंह लालपुरा ने कहा कि किसी भी आयोग की कार्यवाही गोपनीय होती है और सुनवाई के दौरान मीडिया को बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में प्रचार पाने के लिए संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन किया गया।
अंत में उन्होंने कहा कि आयोगों को वही कार्य करना चाहिए जिसकी अनुमति भारतीय संविधान देता है। यदि संवैधानिक सीमाओं का पालन नहीं किया गया तो इससे जनता का भरोसा कमजोर होगा। उन्होंने इस पूरे मामले पर दोबारा विचार करने की अपील की।
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