रंधावा का कांग्रेस नेतृत्व पर बड़ा हमला, बोले- पार्टी बचानी है तो छोड़नी होगी ईगो

Edited By Urmila,Updated: 18 Jul, 2026 03:43 PM

randhawa s scathing attack on the congress leadership

पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद एक बार फिर खुलकर सामने आ गए हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने एक इंटरव्यू के दौरान पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली, संगठन की स्थिति और पंजाब के मौजूदा हालात पर खुलकर अपनी राय रखी।

चंडीगढ़: पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद एक बार फिर खुलकर सामने आ गए हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने एक इंटरव्यू के दौरान पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली, संगठन की स्थिति और पंजाब के मौजूदा हालात पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के साथ अपने मतभेदों को भी सार्वजनिक किया। उन्होंने कहा कि पार्टी को बचाने के लिए कांग्रेस नेतृत्व को अपनी ईगो छोड़नी होगी। 

रंधावा ने कहा कि कांग्रेस में नेताओं के बीच संवाद की कमी दिखाई दे रही है। उनका कहना था कि संगठन में वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का पूरा लाभ नहीं लिया जा रहा। उन्होंने कहा कि कई बार सार्वजनिक मंचों पर ऐसे बयान दिए जाते हैं, जिससे पार्टी के भीतर असहज माहौल बनता है। उनका मानना है कि कांग्रेस को मजबूत करना है तो सभी नेताओं को एक-दूसरे का सम्मान करते हुए सामूहिक नेतृत्व की भावना से आगे बढ़ना होगा।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज जिस दौर से गुजर रही है, उसमें व्यक्तिगत राजनीति की बजाय संगठन को प्राथमिकता देने की जरूरत है। अगर नेता आपसी मतभेदों को किनारे रखकर साथ काम करेंगे, तभी पार्टी दोबारा मजबूती से खड़ी हो सकेगी। रंधावा ने आरोप लगाया कि पार्टी में वरिष्ठ नेताओं के सम्मान का पूरा ध्यान नहीं रखा जा रहा। उन्होंने कहा कि वह राजा वड़िंग को अपना छोटा भाई और नेता मानते हैं, लेकिन कई बार सार्वजनिक मंचों पर की गई टिप्पणियों से उन्हें ठेस पहुंची और उन्होंने खुद को अपमानित महसूस किया।

कादियां में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के साथ हुए विवाद का जिक्र करते हुए रंधावा ने कहा कि ऐसे मामलों में पार्टी के सभी नेताओं को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए था। उनका कहना था कि यदि जिले के सभी कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता एक मंच पर होते तो हालात अलग हो सकते थे। उन्होंने इसे संगठनात्मक समन्वय की कमी बताया।

राज्य की कानून-व्यवस्था पर बोलते हुए रंधावा ने कहा कि सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि व्यापारियों और आम लोगों में भय का माहौल है तथा रंगदारी और गैंगस्टर गतिविधियों की घटनाएं चिंता का विषय बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थ पहुंचने की घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं।

उन्होंने बताया कि इसी तरह के मामलों को लेकर उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री से भी मुलाकात की थी ताकि सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त बनाया जा सके। उनका कहना था कि यह राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि लोगों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है।

रंधावा ने आरोप लगाया कि पंजाब में अपराधियों के हौसले बढ़े हैं और कई मामलों में व्यापारी तथा आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल घोषणाओं तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर कानून-व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

भाजपा के पंजाब में भविष्य को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि राज्य की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं और यहां की जनता का राजनीतिक मिजाज अन्य राज्यों से अलग है। साथ ही उन्होंने केंद्र से पंजाब के लिए औद्योगिक निवेश, रोजगार, किसानों की समस्याओं और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान देने की मांग की।

रंधावा ने यह भी कहा कि पंजाब के कई संवेदनशील मामलों में राजनीति से ऊपर उठकर फैसला लेने की जरूरत है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से भी अपील की कि व्यक्तिगत मतभेदों को पीछे छोड़कर संगठन को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाए।

एक निजी चैनल को इंटरव्यू दौरान रंधावा ने पंजाब में भाजपा के भविष्य को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में भाजपा के लिए सरकार बनाना संभव नहीं है। इस दौरान उन्होंने कहा, "जैसे गधे के सिर पर सींग नहीं आ सकते, वैसे ही पंजाब में भाजपा कभी नहीं आ सकती।" केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू पर निशाना साधते हुए रंधावा ने कहा कि हरजीत सिंह ग्रेवाल को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन बनाकर भाजपा ने बिट्टू की राजनीतिक भूमिका सीमित कर दी है। प्रधानमंत्री के पंजाब दौरों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश को केवल रेलवे स्टेशनों के सौंदर्यीकरण या बुनियादी सुविधाओं की नहीं, बल्कि रेलवे कोच फैक्ट्री, नए औद्योगिक पैकेज और किसानों के कृषि कर्ज की पूर्ण माफी जैसी बड़ी योजनाओं की जरूरत है।

वहीं, अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' पर प्रतिबंध के मुद्दे पर भी रंधावा ने भाजपा को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म पर रोक लगाना राजनीतिक फैसला है और इसे चुनावी ध्रुवीकरण की रणनीति के तहत देखा जाना चाहिए। रंधावा के इन बयानों के बाद पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि उनके बयान आने वाले दिनों में प्रदेश कांग्रेस के भीतर नई बहस को जन्म दे सकते हैं।

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