बरसात का साइड इफेक्ट : डेंगू-मलेरिया के साथ चेस्ट इन्फेक्शन ने बढ़ाई चिंता, अस्पतालों में बढ़ी भीड़

Edited By Kalash,Updated: 03 Aug, 2026 11:50 AM

rain side effect chest infections and other disease

बरसात का मौसम जहां लोगों को गर्मी से राहत देता है वहीं यह अपने साथ बीमारियों का बड़ा खतरा भी लेकर आता है।

अमृतसर (दलजीत): बरसात का मौसम जहां लोगों को गर्मी से राहत देता है वहीं यह अपने साथ बीमारियों का बड़ा खतरा भी लेकर आता है। अमृतसर सहित पंजाब के कई जिलों में इन दिनों मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ौतरी दर्ज की जा रही है। अस्पतालों और क्लीनिकों में वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और पेट संबंधी संक्रमण के मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। इसके साथ ही इस बार चेस्ट इन्फेक्शन के मामलों में भी तेजी ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन रही है, जो मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। यही वजह है कि डेंगू और मलेरिया के मामलों में बढ़ौतरी हो रही है। मरीज तेज बुखार, बदन दर्द, सिरदर्द और कमजोरी जैसी शिकायतों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं।

दूसरी ओर नमी और मौसम में लगातार बदलाव के कारण श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियां भी तेजी से फैल रही हैं। खांसी, जुकाम, गले में खराश और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं आम हो चुकी हैं। डॉक्टरों के अनुसार चेस्ट इन्फेक्शन के मरीजों की संख्या में पिछले कुछ दिनों में बढ़ौतरी हुई है। यह संक्रमण समय पर इलाज न मिलने पर निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है। खान-पान में लापरवाही भी इस मौसम में बीमारियों को बढ़ावा देती है। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, दूषित पानी और अस्वच्छ वातावरण पेट के संक्रमण का मुख्य कारण बन रहे हैं। उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बुखार के मामलों में भी तेजी देखी जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइंस की करें पालना 

सरकारी मेडिकल कॉलेज के सीनियर डाक्टर संदीप महाजन ने कहा कि बरसात के मौसम में रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है जिससे शरीर जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाता है। ऐसे में साफ-सफाई, संतुलित आहार और सावधानी बेहद जरूरी है। इन दिनों में कटे हुए फल ज्यादा देर रखने के बाद नहीं खाने चाहिएं। स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइंस की पालना करनी चाहिए।

लापरवाही पड़ सकती है भारी 

सरकारी टी.बी. अस्पताल के डा. विशाल वर्मा ने कहा कि लोग अक्सर शुरुआती लक्षणों को नजर-अंदाज कर देते हैं, जो बाद में गंभीर बीमारी का कारण बन जाते हैं। हल्की खांसी, बुखार या कमजोरी को सामान्य समझकर नजर-अंदाज करना खतरनाक हो सकता है। समय रहते जांच और इलाज बेहद जरूरी है।

प्रशासन अलर्ट, अभियान तेज 

सिविल सर्जन डा. रश्मि विज ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से मच्छरों पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। शहर में फॉगिंग, एंटी-लारवा छिड़काव और जागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें।

मच्छरों को पनपने से रोकना सबसे जरूरी 

बरसात के मौसम में डेंगू और मलेरिया का खतरा सबसे ज्यादा होता है। लोग अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले और छतों पर जमा पानी को नियमित रूप से साफ करना बेहद जरूरी है।

“बच्चों और बुजुर्गों को रखें विशेष सुरक्षित” 

सरकारी टी.बी. अस्पताल के मुखी डा. गुनीत ने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। उन्हें संक्रमण जल्दी प्रभावित करता है। उन्हें साफ-सफाई, पौष्टिक आहार और समय पर दवा देना बेहद जरूरी है। साफ पानी और ताजा भोजन ही सबसे बड़ी सुरक्षा बरसात में दूषित पानी और बासी खाना बीमारियों की बड़ी वजह है। उबला हुआ पानी पीएं, बाहर का खाना खाने से बचें और हाथों की सफाई पर विशेष ध्यान दें।

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