Edited By Vatika,Updated: 22 Jul, 2026 03:19 PM

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी किए गए नए निर्देशों ने शिक्षा प्रणाली में हलचल मचा दी है।
अमृतसर (दलजीत) : पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी किए गए नए निर्देशों ने शिक्षा प्रणाली में हलचल मचा दी है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि जिन छात्रों का डिजीटल जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं होगा उनके 10वीं कक्षा के प्रमाण पत्र पर जन्म तिथि दर्ज नहीं की जाएगी। इसके साथ ही बोर्ड द्वारा सी.आर.एस. रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए 31 दिसम्बर तक की समय-सीमा भी निर्धारित की गई है। इस फैसले के बाद पंजाब के हजारों छात्रों, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधकों में चिंता का माहौल बन गया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा बहुत ही संवेदनशील मामला है।जानकारी के अनुसार पंजाब के कई छात्रों का जन्म उस समय हुआ था जब डिजीटल जन्म रजिस्ट्रेशन की प्रणाली पूरी तरह लागू नहीं थी। गांवों और कस्बों में आज भी हजारों ऐसे मामले हैं जहां जन्म के रिकॉर्ड अधूरे, गलत या बिल्कुल मौजूद नहीं हैं। कई अभिभावकों को देरी से रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए नोटरी, हलफनामे और अदालती प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है जिससे समय और पैसे का भारी नुकसान हो रहा है। इस स्थिति में सवाल यह उठता है कि यदि सिस्टम में खामी है तो उसकी सजा छात्रों को क्यों मिले?
10वीं के सर्टीफिकेट पर जन्म तिथि न होने के गंभीर प्रभाव
यदि 10वीं के सर्टीफिकेट पर जन्म तिथि दर्ज नहीं होती है तो इसके दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं। छात्रों को उच्च शिक्षा में दाखिला लेने से लेकर नौकरियों तक कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। पासपोर्ट बनवाने, वीजा प्राप्त करने, विदेशी पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और दस्तावेज़ तस्दीक के दौरान भी यह एक बड़ी रुकावट बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार एक प्रमाण पत्र पर जन्म तिथि का न होना छात्र के पूरे करियर पर असर डाल सकता है और भविष्य में कानूनी उलझनें भी पैदा कर सकता है।
एफिलिएटेड स्कूल एसोसिएशन का कड़ा रुख
इस मामले पर मान्यता प्राप्त एफिलिएटेड स्कूल एसोसिएशन ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव सुजीत शर्मा बबलू ने कहा कि बोर्ड का यह फैसला छात्र-हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि हजारों छात्र ऐसे हैं जिनके डिजीटल रिकॉर्ड अभी तक पूरे नहीं हैं और इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। सुजीत शर्मा बबलू ने कहा कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में कमी है तो उसकी सजा बच्चों को नहीं मिलनी चाहिए। 10वीं के सर्टीफिकेट पर जन्म तिथि दर्ज न करना उनके भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। बोर्ड को तुरंत इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक सभी छात्रों के रिकॉर्ड पूरे नहीं हो जाते तब तक पुरानी प्रक्रिया के अनुसार ही जन्म तिथि दर्ज की जाए और वैकल्पिक दस्तावेजों को भी मान्यता दी जाए।
बोर्ड के फैसले पर उठ रहे तीखे सवाल
इस मामले पर बोर्ड और प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शिक्षा जगत से जुड़े लोग पूछ रहे हैं कि क्या इस फैसले से पहले ज़मीनी हकीकत का जायजा लिया गया था? क्या ग्रामीण क्षेत्रों में रिकॉर्ड की स्थिति को समझा गया? और क्या प्रभावित परिवारों को समय पर उचित सुविधाएं प्रदान की गईं?
भविष्य से खिलवाड़ न बने प्रशासनिक प्रक्रिया
शिक्षा विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि किसी भी तकनीकी या प्रशासनिक कमी के कारण छात्रों का भविष्य दांव पर नहीं लगना चाहिए। शिक्षा प्रणाली का मुख्य उद्देश्य बच्चों को अवसर देना है, न कि उनके लिए रुकावटें खड़ी करना। सरकार और बोर्ड के लिए यह समय है कि वे इस मामले में मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए तुरंत समाधान निकालें ताकि किसी भी छात्र का भविष्य सिर्फ एक दस्तावेज़ की कमी के कारण अंधकार में न धकेला जाए।