Edited By Kamini,Updated: 30 Oct, 2026 05:54 PM

पंजाब के गांवो की हवा को लेकर हैरानीजनक रिपोर्ट सामने आई है। पंजाब के गांव पहले कभी अपनी साफ हवा और खुले माहौल के लिए जाने जाते थे, लेकिन अब शहरों की तरह गांव भी एयर पॉल्यूशन की गंभीर चपेट में हैं।
पंजाब डेस्क: पंजाब के गांवो की हवा को लेकर हैरानीजनक रिपोर्ट सामने आई है। पंजाब के गांव पहले कभी अपनी साफ हवा और खुले माहौल के लिए जाने जाते थे, लेकिन अब शहरों की तरह गांव भी एयर पॉल्यूशन की गंभीर चपेट में हैं। 'सेंटर ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में शहरों और गांवों के बीच एयर पॉल्यूशन का अंतर सिर्फ 4 प्रतिशत रह गया है। दोनों इलाकों में हवा में मौजूद बहुत बारीक पॉल्यूटेंट पार्टिकल्स का सालाना औसत लेवल नेशनल स्टैंडर्ड्स से कहीं ज़्यादा रिकॉर्ड किया गया है।
रिपोर्ट के डेटा के मुताबिक, पंजाब के शहरी इलाकों में PM 2.5 का सालाना औसत लेवल 58.3 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और ग्रामीण इलाकों में 56 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रिकॉर्ड किया गया है, जबकि नेशनल एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स के मुताबिक PM 2.5 की सालाना ज्यादा से ज्यादा लिमिट 40 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है। इससे साफ पता चलता है कि गांवों से लेकर शहरों तक पूरे राज्य में एयर क्वालिटी नॉर्म्स से ज्यादा प्रदूषित हो गई है। केंद्र सरकार ने पंजाब के 9 शहरों अमृतसर, डेराबस्सी, मंडी गोबिंदगढ़, जालंधर, खन्ना, लुधियाना, निया नांगल, पठानकोट और पटियाला को 'नॉन-अटेनमेंट शहरों' की लिस्ट में डाल दिया है। ये वे शहर हैं जो तय समय में नेशनल एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड को पूरा करने में फेल रहे हैं।
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