पंजाब के मंत्रियों की किसान यूनियन से बैठक, मंडीकरण संबंधी कानून पर हुई चर्चा

Edited By Vatika,Updated: 20 Oct, 2020 09:13 AM

punjab ministers meet farmers  union

खेती कानूनों के साथ-साथ पंजाब के 2017 के मंडीकरण संबंधी एक्ट को रद्द करने की मांग करने वाली भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के नेताओं के साथ पंजाब सरकार के तीन कैबिनेट मंत्रियों ने आज यहां पंजाब भवन में बैठक की।

चंडीगढ़(रमनजीत): खेती कानूनों के साथ-साथ पंजाब के 2017 के मंडीकरण संबंधी एक्ट को रद्द करने की मांग करने वाली भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के नेताओं के साथ पंजाब सरकार के तीन कैबिनेट मंत्रियों ने यहां पंजाब भवन में बैठक की। किसान संगठन के नेताओं ने सरकार से हुई बातचीत पर नपा-तुला विश्वास जताते हुए कहा कि मंत्रियों द्वारा गोलमोल बातें की गई हैं और भरोसा दिया गया है कि केंद्र के खेती कानूनों के खिलाफ बिल लाने के काम को अंजाम देने के बाद पंजाब सरकार अपने मंडीकरण एक्ट को भी वापस लेगी।

किसान नेताओं ने कहा कि सरकारें वायदे तो कई करती हैं, लेकिन निभाती नहीं हैं, इसलिए देखेंगे कि इस मामले पर सरकार का रुख क्या रहता है। ध्यान रहे कि भाकियू (उगराहां) ने रा’य के कानून का हवाला देते हुए ऐलान किया था कि यदि सरकार ने इसे वापस नहीं लिया तो विधानसभा के सामने धरना दिया जाएगा। कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखङ्क्षबद्र  सिंह सरकारिया व सुखजिंद्र सिंह रंधावा के साथ बैठक करने के बाद किसान संगठन प्रधान जोङ्क्षगदर सिंह उगराहां ने कहा कि पंजाब सरकार ने मंडीकरण संबंधी कानून में बदलाव करके यह प्रावधान कर दिया था कि बड़े व्यापारी पंजाब में मंडियों के बाहर भी किसानों से फसल खरीद सकते हैं। यह प्रावधान किसानों के पक्ष का नहीं है, जिसे रद्द करने की मांग की गई है। दूसरे रा’यों से खरीदकर पंजाब के शैलरों में व्यापारियों द्वारा धान रखे जाने संबंधी मंत्रियों ने भरोसा दिया कि इस गैर कानूनी काम को सख्ती से रोका जाएगा।  

अब 21 को होगी 30 किसान संगठनों की रिव्यू बैठक
पंजाब विधानसभा द्वारा 19 की बजाय 20 अक्तूबर को खेती कानूनों के खिलाफ बिल लाए जाने संबंधी सूचना मिलने के बाद 30 किसान संगठनों ने अपनी 20 अक्तूबर को होने वाली रिव्यू बैठक अब 21 को करने का फैसला किया है। इस संबंध में भाकियू (डकौंदा) के प्रधान बूटा सिंह बुर्जगिल ने कहा कि रा’य में खेती कानूनों के विरोध में चल रहे किसान संघर्ष को जारी रखा जाएगा। 

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