Edited By Urmila,Updated: 11 Feb, 2026 01:20 PM

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक फैसले में साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर तैनाती के दौरान बंकर में सोते हुए सैनिक की मौत को भी 'ड्यूटी पर मौत' माना जाएगा।
चंडीगढ़ (गंभीर): पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक फैसले में साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर तैनाती के दौरान बंकर में सोते हुए सैनिक की मौत को भी 'ड्यूटी पर मौत' माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि अगर सैनिक नोटिफाइड ऑपरेशनल एरिया में तैनात है और मिलिट्री सर्विस से जुड़े हालात में उसकी मौत होती है, तो उसके आश्रितों को उदारवादी पारिवारिक पेंशन की ऊंची कैटेगरी का हक होगा। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और विकास सूरी की डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार की अपील खारिज कर दी और आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल चंडीगढ़ के 16 मार्च, 2023 के आदेश को बरकरार रखा।
ए.एफ.टी. सुप्रीम कोर्ट ने रेवाड़ी के रहने वाले मृतक आर्मी ऑफिसर मेजर सुशील कुमार सैनी की पत्नी अनुराधा सैनी को लिबरल फैमिली पेंशन देने का आदेश दिया था। केंद्र सरकार ने दलील दी कि ऑफिसर की मौत नींद दौरान हुई थी और इसलिए इसे ऑपरेशनल एक्टिविटी के दौरान मौत नहीं माना जा सकता और ज्यादा से ज्यादा 'स्पेशल फैमिली पेंशन' ही दी जा सकती है। लेकिन, हाई कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि ऑफिसर भारत-पाक बॉर्डर पर ऑपरेशन रक्षक के तहत नोटिफाइड ऑपरेशनल एरिया में पोस्टेड थे और कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी रिपोर्ट में उसकी मौत को मिलिट्री सर्विस से जुड़ा बताया गया है।
रिकॉर्ड के मुताबिक, घटना वाले दिन बॉर्डर एरिया में घुसपैठ की कोशिश की जानकारी थी, जिसके बाद मेजर सैनी ने जरूरी निर्देश दिए और पूरी स्थिति पर नजर रखी। ऑपरेशनल स्ट्रेस और पहले से हाई ब्लड प्रेशर की वजह से उन्हें रात में हार्ट अटैक आया, जिससे उनकी मौत हो गई। सरकारी गाइडलाइंस का हवाला देते हुए बेंच ने कहा कि ऐसे मामले कैटेगरी E(I) में आते हैं, जिसमें सरकार द्वारा नोटिफाइड मिलिट्री ऑपरेशन के दौरान होने वाली मौतें शामिल हैं।
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