Edited By Kamini,Updated: 05 Feb, 2026 01:29 PM

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पेंशन को लेकर अहम फैसला सुनाया है।
पंजाब डेस्क: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पेंशन को लेकर अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने पेंशन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि केवल लंबे समय तक सेवा करने से किसी कर्मचारी को पेंशन का अधिकार नहीं मिल जाता। पेंशन कोई इनाम नहीं, बल्कि नियुक्ति की प्रक्रिया और सेवा नियमों के तहत मिलने वाला कानूनी लाभ है।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी ने सिविल क्षेत्र में पुनर्नियुक्ति के आधार पर पेंशन की मांग की थी। याचिकाकर्ता को पंजाब बिजली रैगूलेटरी कमिशन में अस्थायी पद पर नियुक्त किया गया था, लेकिन उसे पेंशन लाभ नहीं दिया गया। कोर्ट ने लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) अशोक की याचिका खारिज करते हुए कहा कि उनकी नियुक्ति ऐसी नहीं थी, जिससे उन्हें पेंशन का वैधानिक हक मिल सके। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पेंशन अधिकार तभी बनता है जब सेवा शर्तें और नियम इसकी अनुमति देते हों।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2002 में याचिकाकर्ता की नियुक्ति पुनर्नियुक्ति के आधार पर की गई थी और नियुक्ति पत्र में पद को पूरी तरह अस्थायी बताया गया था, जिसे किसी भी समय समाप्त किया जा सकता था। अदालत ने यह भी कहा कि आयोग में कभी भी स्थायी या पेंशन योग्य पद सृजित किए जाने के प्रमाण नहीं मिले। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2015 में अधिसूचित सेवा नियमों में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि आयोग में सभी नियुक्तियां डेपुटेशन, पुनर्नियुक्ति या अनुबंध के आधार पर होंगी और इनमें पेंशन जैसे लाभ शामिल नहीं होंगे। पेंशन संवैधानिक अधिकार हो सकता है, लेकिन यह अधिकार तभी लागू होता है जब नियुक्ति और सेवा नियम इसकी शर्तें पूरी करते हों।
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