Pension को लेकर हाईकोर्ट का सख्त आदेश, पेंशन कोई दान नहीं बल्कि....

Edited By Kamini,Updated: 21 Jan, 2026 04:31 PM

pension is not a charity high court

पेंशन को दान नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार बताते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 83 साल की एक विधवा को राहत दी है।

चंडीगढ़ (गंभीर): पेंशन को दान नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार बताते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 83 साल की एक विधवा को राहत दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि फैमिली पेंशन का भुगतान न होना लगातार अन्याय है, जिससे हर महीने नए क्लेम आते हैं। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने 3 दशक से ज़्यादा समय बाद फाइल की गई पिटीशन को देरी और लापरवाही (तय समय से ज्यादा केस फाइल करने में देरी) के आधार पर खारिज करने से इनकार कर दिया और पंजाब सरकार को फैमिली पेंशन जारी करने और ब्याज के साथ सीमित समय के लिए बकाया पेमेंट करने का आदेश दिया।

जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने यह फैसला बदका देवी की फाइल की गई पिटीशन पर सुनाया। केस के मुताबिक, पिटीशनर बदका देवी के पति स्वर्गीय राम दास लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट में माली का काम करते थे और 20 जुलाई, 1991 को सर्विस के दौरान उनकी मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद बदका देवी नियमों के तहत फैमिली पेंशन और दूसरे बेनिफिट्स की हकदार थीं, लेकिन उन्हें ये बेनिफिट्स कभी नहीं मिले। पिटीशन में कहा गया है कि बदका देवी एक अनपढ़ और पैसे से कमज़ोर बुज़ुर्ग महिला हैं, जिन्हें सरकारी कामों की कोई जानकारी नहीं थी।

डिपार्टमेंट में समय पर अप्लाई करने और रिप्रेजेंटेशन देने और सभी जरूरी डॉक्यूमेंट जमा करने के बावजूद, 30 साल से ज़्यादा समय तक न तो उन्हें फैमिली पेंशन मिली और न ही कोई दूसरा रिटायरमेंट बेनिफिट। राज्य सरकार ने दलील दी कि पिटीशनर ने बहुत देर से कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, क्योंकि पति की मौत 1991 में हो गई थी और इतने लंबे समय के बाद पिटीशन फाइल करना देरी और झिझक से भरा था। इसमें यह भी कहा गया है कि फैमिली पेंशन देने से पहले पेंशन फंड में जरूरी कंट्रीब्यूशन जमा नहीं किया गया था। हालांकि, राज्य ने माना कि फैमिली पेंशन देने के लिए 23 दिसंबर, 2025 को संबंधित अथॉरिटी को निर्देश दिए गए थे।

पेंशन क्लेम एक लगातार चलने वाला अधिकार  

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई अहम फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पेंशन क्लेम एक बार का अधिकार नहीं है, बल्कि एक लगातार चलने वाला अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि हर महीने पेंशन न मिलना अपने आप में एक नया अन्याय है और इसलिए देरी के लिए टेक्निकल दलीलें पेंशन से जुड़े मामलों में लागू नहीं की जा सकतीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि पेंशन सीधे संविधान के आर्टिकल 14 और 21 से जुड़ी है क्योंकि यह एक बुज़ुर्ग व्यक्ति के सम्मानपूर्ण जीवन और रोज़ी-रोटी का आधार है।

पेंशन का दावा पूरी तरह से सही 

कोर्ट ने साफ किया कि पिटीशनर का फ़ैमिली पेंशन का दावा पूरी तरह से सही है और इसे देरी के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। हालांकि, बैलेंस बनाते हुए, हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि एरियर का पेमेंट अनिश्चित समय के लिए नहीं किया जा सकता। इसलिए, कोर्ट ने निर्देश दिया कि पिटीशन फाइल करने की तारीख से पहले के तीन साल का फैमिली पेंशन का एरियर बड़का देवी को 6 परसेंट सालाना ब्याज के साथ दिया जाए। राज्य सरकार और संबंधित डिपार्टमेंट को भी चार हफ़्ते के अंदर फैमिली पेंशन और दूसरे मंजूर पेंशन बेनिफिट्स का रेगुलर मंथली पेमेंट शुरू करने का आदेश दिया गया।

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