पटियाला SSP की वायरल ऑडियो मामले में हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला, चुनावों में हुई थी गड़बड़ी

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 04 Feb, 2026 06:22 PM

the high court has delivered its verdict in the patiala ssp s viral audio case

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पटियाला के SSP की वायरल ऑडियो मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए इस मामले की जांच पंजाब सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर CFSL चंडीगढ़ को स्थानांतरित कर दी है। इस मामले के संबंध में शिरोमणि अकाली दल के लीगल सेल द्वारा एक...

पंजाब डैस्क : पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पटियाला के SSP की वायरल ऑडियो मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए इस मामले की जांच पंजाब सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर CFSL चंडीगढ़ को स्थानांतरित कर दी है। इस मामले के संबंध में शिरोमणि अकाली दल के लीगल सेल द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई, जिसमें हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकीलों ने अदालत के इस फैसले का स्वागत किया।

अकाली दल के प्रवक्ता एडवोकेट अरशदीप कलेर, एडवोकेट परमवीर सनी और एडवोकेट गुरसिमरन सिंह ने बताया कि दिसंबर में जिला परिषद और ब्लॉक समिति के चुनावों के दौरान पटियाला के SSP की एक ऑडियो वायरल हुई थी, जिसमें वे कथित तौर पर SP, DSP और SHO को यह निर्देश दे रहे थे कि विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को नामांकन केंद्रों तक पहुंचने से रोका जाए।

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इस ऑडियो को सार्वजनिक किया था, जिसके बाद लीगल सेल ने राज्य चुनाव आयोग कमिश्नर राज कमल चौधरी के पास शिकायत दर्ज करवाई थी। हालांकि, पटियाला के DIG ने आधे घंटे के अंदर ही इसे AI कंटेंट घोषित कर दिया और अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर दी थी। अकाली दल ने आरोप लगाया कि जांच करने की बजाय पुलिस ने ऑडियो को सोशल मीडिया से हटाने और शिकायतकर्ताओं को ही नोटिस भेजने पर जोर दिया।

अरशदीप कलेर ने बताया कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि राज्य चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था होनी चाहिए, न कि सरकार के प्रभाव में काम करने वाली। अदालत ने हैरानी जताई कि 10 दिसंबर के आदेशों के बावजूद, जिसमें जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाने की उम्मीद जताई गई थी, चुनाव आयोग ने इसे फिर से पंजाब की लैबोरेटरी को ही भेज दिया।

अकाली दल के प्रवक्ता ने आगे बताया कि अदालत ने अब इस ऑडियो की जांच के लिए इसे CFSL चंडीगढ़ भेज दिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि निष्पक्ष जांच के बाद संविधान का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। वकीलों के अनुसार यह लड़ाई सिर्फ किसी पार्टी की नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने की है।

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