निजी वाहनों पर 'पंजाब सरकार' लिखने वाले कर्मचारियों की खैर नहीं, होने जा रही सख्त कार्रवाई

Edited By Kalash,Updated: 12 Aug, 2026 05:38 PM

punjab government employee vehicle

पंजाब में अपने निजी वाहनों पर 'पंजाब सरकार' लिखवाकर सरकारी वाहन होने का प्रभाव पैदा करने वाले लोग अब कानूनी घेरे में आ सकते हैं।

अमृतसर (दलजीत): पंजाब में अपने निजी वाहनों पर 'पंजाब सरकार' लिखवाकर सरकारी वाहन होने का प्रभाव पैदा करने वाले लोग अब कानूनी घेरे में आ सकते हैं। सरकारी विभागों में कार्यरत कई कर्मचारियों द्वारा अपने निजी वाहनों के बोनट, पिछले हिस्से और अन्य स्थानों पर 'पंजाब सरकार या गवर्नमेंट ऑफ पंजाब' लिखवाने का रुझान बढ़ने से मामला गंभीर हो गया है। सीनियर एडवोकेट साईं किरण परिंजा ने इस मामले को लेकर माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि वाहन निजी मालकी वाला है और सरकारी विभाग के नाम पर पंजीकृत नहीं है, तो उस पर सरकारी पहचान दर्शाने वाले शब्द लिखने की कानूनी मंजूरी के संबंध में स्पष्टता अनिवार्य है।

सरकारी नाम की आड़ में निजी रोब? 

एडवोकेट परिंजा ने कहा कि यह सिर्फ गाड़ी पर लिखे कुछ शब्दों का मामला नहीं है। यदि किसी निजी वाहन पर इस तरह से 'पंजाब सरकार' लिखा गया है कि पुलिस, ट्रैफिक अधिकारी, टोल कर्मचारी या आम लोग उसे सरकारी वाहन समझें, तो इसकी कानूनी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी विभाग में नौकरी करना और सरकारी वाहन का मालिक होना दो अलग बातें हैं। किसी कर्मचारी की निजी गाड़ी सिर्फ उसके सरकारी पद के कारण सरकारी वाहन नहीं बन जाती।

पुलिस की ढिलाई से बढ़ी सरकारी नाम लिखने की होड़ 

एडवोकेट साईं किरन परिंजा ने कहा कि इस रुझान पर समय रहते कार्रवाई न होने के कारण अब निजी वाहनों पर सरकारी नाम लिखवाने की होड़ बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि एक वाहन को ऐसी पहचान देने के बावजूद कोई जांच नहीं होती तो इससे दूसरों को भी ऐसा करने का हौसला मिलता है। उन्होंने मांग की कि ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा पंजाब भर में ऐसे वाहनों की जांच की जाए।

आर.सी. देखकर तय हो गाड़ी सरकारी है या निजी 

एडवोकेट परिंजा के अनुसार ऐसे मामलों में सबसे पहले वाहन की आर.सी. की जांच की जानी चाहिए। यह देखा जाए कि वाहन किसके नाम पर पंजीकृत है और उसकी श्रेणी क्या है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यह भी जांचना चाहिए कि 'पंजाब सरकार' लिखने के लिए किसी सक्षम अधिकारी की लिखित मंजूरी है या नहीं और क्या यह लिखावट लोगों या सरकारी अमले को वाहन की वास्तविक पहचान के बारे में गुमराह कर सकती है।

मोटर वाहन एक्ट की धारा 111 (2) (ई) का हवाला 

एडवोकेट साईं किरन परिंजा ने मोटर वाहन एक्ट 1988 की धारा 111(2)(ई) का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार को वाहनों पर पंजीकरण संख्या के अलावा दर्शाई जाने वाली जानकारी और उसके तरीके के बारे में नियम बनाने की शक्ति है। उन्होंने कहा कि इसलिए निजी वाहन पर सरकारी पहचान दर्शाने वाली लिखावट की कानूनी मंजूरी और उसके प्रदर्शन के तरीके की जांच संबंधित अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए।

लाल बत्ती मामले का भी दिया हवाला 

एडवोकेट परिंजा ने अभय सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार, (2013) 15 एस.सीसी. 435 मामले का हवाला देते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने वाहनों पर बिना अधिकार विशेष सरकारी पहचान के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण सिद्धांत स्पष्ट किए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'पंजाब सरकार' लिखना और लाल बत्ती का उपयोग करना एक जैसे मामले नहीं हैं लेकिन सरकारी अथॉरिटी या विशेष सरकारी दर्जे से जुड़ी पहचान का बिना अधिकार उपयोग करने के मामले में अदालती सिद्धांत महत्व रखते हैं।

परिवहन कमिश्नर और ट्रैफिक पुलिस से कार्रवाई की मांग

एडवोकेट साईं किरन परिंजा ने पंजाब के परिवहन कमिश्नर, राज्य परिवहन प्राधिकरण और ट्रैफिक पुलिस से मांग की कि ऐसे वाहनों की जांच करवाई जाए और जहां नियमों का उल्लंघन सामने आए, वहां कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि कार्रवाई किसी एक विभाग या व्यक्ति तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि नियम सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए।

सरकार स्पष्ट करे, कौन लिख सकता है 'पंजाब सरकार'? 

एडवोकेट परिंजा ने मांग की कि सरकार एक स्पष्ट लिखित आदेश या सर्कुलर जारी करे, जिसमें बताया जाए कि निजी वाहनों पर 'पंजाब सरकार' या 'गवर्नमेंट ऑफ पंजाब' जैसी पहचान कौन और किस अधिकार के तहत इस्तेमाल कर सकता है। उन्होंने कहा कि सरकारी पहचान किसी व्यक्ति की निजी सुविधा या रोब दिखाने का साधन नहीं बन सकती। यदि वाहन सरकारी नहीं है, तो उसे सरकारी वाहन के रूप में दर्शाने वाली पहचान के उपयोग के बारे में सरकार को स्पष्ट नीति और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि निजी वाहन पर सरकारी नाम लिखकर सरकारी दर्जे का प्रभाव पैदा करने की प्रवृत्ति को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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