Edited By Vatika,Updated: 21 Oct, 2026 08:53 AM

बनस/पी.आर.टी.सी. ठेका कर्मचारी यूनियन से संबंधित 7500 कर्मचारियों ने मंगलवार
जालंधर(पुनीत): पबनस/पी.आर.टी.सी. ठेका कर्मचारी यूनियन से संबंधित 7500 कर्मचारियों ने मंगलवार रात 12 बजे से हड़ताल शुरू कर दी है, जिसके चलते यूनियन के अगले फैसले तक 3000 के करीब सरकारी बसों का चक्का जाम रहेगा। वहीं, यूनियन द्वारा बिना पूर्व सूचना के नेताओं के घेेराव की बात कही गई है। इससे पहले यूनियन द्वारा 3 दिन की हड़ताल की जाती थी लेकिन इस बार यूनियन द्वारा मांगे पूरी होने तक हड़ताल को जारी रखा जा सकता है।यूनियन के प्रदेश महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने कहा कि बसों के चलने की अगली तिथी के बारे में बताना अभी पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता। यूनियन अब आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार है।
वहीं, ठेका कर्मचारियों की इस हड़ताल दौरान पक्के कर्मचारी बसें चलाएंगे। इस समय प्रत्येक डिपो में मात्र कुछ एक पक्के कर्मचारी कार्यरत्त है, जिसके चलते पूरे पंजाब में 100 बसों का परिचालन होना भी मुश्किल है। इसके चलते सफर पर जाने वाले यात्रियों को दिक्कतें और परेशानियां पेश आएगी। यूनियन द्वारा की जा रही हड़ताल के चलते आज शाम के बाद लंबे रूट की बसों का परिचालन रोक दिया गया। इसके चलते पंजाब से बाहर जाने वाली बसों का परिचालन नहीं हो पाया। इसके चलते यात्रियों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। डिपो-2 के प्रधान सतपाल सिंह सत्ता, महासचिव रणजीत सिंह, हरजिंदर सिंह, डिपो-1 से चानण सिंह चनणा, बिक्रमजीत सिंह ने बताया कि हड़ताल के दौरान बस अड्डे व डिपोओं में रोष धरने दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उनकी मांगों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही, जिसके चलते वह विरोध जताने को मजबूर हैं।
नेताओं ने कहा कि कर्मचारियों को पक्का करने की मांग को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। वहीं, आउटसोर्स के क्रम में ठेकेदार को बाहर निकाल कर कर्मचारियों से सीधे तौर पर सेवाएं लेने प्रति गंभीरता नहीं दिखाई जा रही। विभाग द्वारा ठेकेदार को मोटी राशि अदा की जा रही है और बड़े स्तर पर टैक्स भी देना पड़ रहा है, जबकि विभाग करोड़ों रुपए बचा सकता है। उन्होंने कहा कि मिलीभगत के चलते इस मांग को नजर अंदाज किया जा रहा है। वहीं, किलोमीटर स्कीम की बसें डालने का विरोध जताते हुए नेताओं ने कहा कि विभाग द्वारा विरोध के बावजूद टैंडर खोले गए थे, जिससे साबित होता है कि विभाग निजीकरण को बढ़ावा दे रहा है। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। यूनियन नेताओं ने कहा कि पनबस-पी.आर.टी.सी. में आउटसोर्स के जरिए कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रही है व इसके लिए प्रति वर्ष 25 करोड़ से अधिक की राशि जी.एस.टी. के तौर पर खर्च हो जाती है। सरकार कर्मचारियों को सीधा भर्ती करके जी.एस.टी. की राशि बचाकर उसे कर्मचारियों की भलाई पर खर्च करे।