बिजली मीटरों को लेकर PSPCL का बड़ा फैसला, जारी हुए नए Order

Edited By Vatika,Updated: 10 Jul, 2026 12:00 PM

pspcl s major decision regarding electricity meters

करोड़ों रुपए के मीटर टैंडर में कथित रूप से चहेती फर्म को फायदा पहुंचाने वाले तत्कालीन निदेशक और अधिकारियों पर उठे सवाल

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) द्वारा पावर क्वालिटी मीटरों की खरीद के लिए जारी किए गए टेंडरों को नियमों के उल्लंघन का मामला मानते हुए रद्द कर दिया है। अदालत ने निगम को पूरी टेंडर प्रक्रिया दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

 पंजाब केसरी  कर चुका है खुलासा
यह मामला पिछले कुछ समय से काफी चर्चा में था। तकनीकी आधार पर टेंडर प्रक्रिया से बाहर की गई एक कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर टेंडर को चुनौती दी थी। याचिका में खरीदे जाने वाले मीटरों की सीलिंग को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। इस पूरे मामले का खुलासा पहले पंजाब केसरी  ने किया था। बताया गया कि जिस तकनीकी आधार पर एक कंपनी को टेंडर प्रक्रिया से बाहर किया गया था, बाद में जिस कंपनी को टेंडर आवंटित किया गया, उसके मीटरों में भी परीक्षण के दौरान वही तकनीकी खामियां पाई गईं। इसके बावजूद उसे टेंडर दे दिया गया।

PSPCL को अदालत में करारी हार का करना पड़ा सामना 
दूसरी ओर, हाईकोर्ट से झटका मिलने के बाद PSPCL प्रबंधन अब पूरे मामले की गहराई से जांच करने की तैयारी कर रहा है। यह भी पता लगाया जाएगा कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी। माना जा रहा है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हुई तो कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। जानकारी के अनुसार, IEC क्लास-ए पावर क्वालिटी मीटरों की सप्लाई और इंस्टॉलेशन से जुड़े टेंडर (MPQ-246) में उस समय के निदेशक और संबंधित अधिकारियों ने कथित तौर पर नियमों की अनदेखी कर एक विशेष कंपनी को फायदा पहुंचाने की कोशिश की, जिसके चलते PSPCL को अदालत में करारी हार का सामना करना पड़ा। सूत्रों के अनुसार, संबंधित मीटर तकनीकी रूप से टेंडर की अनिवार्य शर्तों पर खरे नहीं उतरते थे। इसके बावजूद तत्कालीन अधिकारियों और निदेशक ने कथित मिलीभगत से उन्हें तकनीकी रूप से योग्य दिखाने का प्रयास किया, ताकि एल-1 (L-1) कंपनी को अनुचित लाभ मिल सके। जानकारी के मुताबिक, टेंडर खोलने की तारीख 28 अप्रैल 2025 तय थी, लेकिन उससे पहले 4 अप्रैल 2025 को तत्कालीन मुख्य अभियंता (मीटरिंग) इंजीनियर जे.एस. जम्मू ने एक विशेष प्रस्ताव रखा, जिसे तत्कालीन निदेशक (जनरेशन) इंजीनियर हरजीत सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने मंजूरी दे दी। इस फैसले के तहत टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि बीत जाने के बाद भी कंपनियों को टाइप टेस्ट रिपोर्ट जमा कराने की अनुमति दी गई, ताकि एल-1 कंपनी टेंडर प्रक्रिया में बनी रह सके।

हाईकोर्ट ने टेंडर रद्द कर दोबारा शुरू किए आदेश
मामले में नया मोड़ तब आया, जब 8 मई 2025 को गठित डेटा असेसमेंट कमेटी, जिसमें इंजीनियर पवन कुमार (डिप्टी मुख्य अभियंता, प्रवर्तन), इंजीनियर जसपाल सिंह (एएसई, डीएस ईस्ट डिवीजन), इंजीनियर रवि कुमार (एएसई, टेक्निकल ऑडिट-2) और इंजीनियर गुरप्रीत सिंह पुरेवाल (एएसई, एमई) शामिल थे, ने 9 सितंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट में मीटरों को लेकर गंभीर तकनीकी आपत्तियां दर्ज कीं। इसके बावजूद तत्कालीन निदेशक (जनरेशन) इंजीनियर हरजीत सिंह ने 23 सितंबर 2025 को मीटरों की दोबारा टेस्टिंग की अनुमति दे दी, जिससे संबंधित कंपनी को राहत मिल गई। इसके बाद 3 अक्टूबर 2025 को समिति ने एल-1 कंपनी की प्राइस बिड खोलने की मंजूरी भी दे दी। पूरे घटनाक्रम के दौरान मीटरिंग विभाग की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता इंजीनियर जतिंदर एस. जम्मू के पास थी। आरोप है कि तकनीकी रूप से अयोग्य मीटरों को योग्य दिखाने और नियमों के विपरीत बार-बार अवसर देने के कारण ही अदालत में PSPCL का पक्ष कमजोर पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप हाईकोर्ट ने टेंडर रद्द कर दोबारा प्रक्रिया शुरू करने के आदेश जारी किए।
 

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