आधी रात को अस्पताल में खौफ का मंजर! मरीज के कमरे को बाहर से लगाया ताला, फेसबुक लाइव पर खुली सिस्टम की पोल

Edited By Kamini,Updated: 19 Jun, 2026 04:34 PM

patient room locked from the outside

पंजाब के सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा और वहां मिलने वाली वीआईपी सुविधाओं के दावे जमीनी स्तर पर कितने खोखले हैं, इसकी एक बेहद डरावनी और हैरान करने वाली तस्वीर बरनाला के सिविल अस्पताल से सामने आई है।

बरनाला (विवेक सिंधवानी): पंजाब के सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा और वहां मिलने वाली वीआईपी सुविधाओं के दावे जमीनी स्तर पर कितने खोखले हैं, इसकी एक बेहद डरावनी और हैरान करने वाली तस्वीर बरनाला के सिविल अस्पताल से सामने आई है। अस्पताल के 'स्पेशल वार्ड' में इलाज करा रहे एक मरीज और उसकी पत्नी को आधी रात को कमरे के अंदर ही बंधक बना दिया गया। किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा बाहर से  ताला लगा देने के बाद, दर्द से तड़पते मरीज की मदद करने के बजाय ड्यूटी स्टाफ 'खौफ' का बहाना बनाकर तमाशा देखता रहा। इस घटना के बाद पीड़ित महिला ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर अस्पताल प्रशासन की सुरक्षा और सफाई व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

घुटने के ऑपरेशन के बाद भर्ती मरीज को आधी रात को किया 'कैद'

प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर की रहने वाली उषा भरी नामक महिला ने फेसबुक पर लाइव होकर इस खौफनाक वाक्य का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उनके पति के घुटनों का ऑपरेशन हुआ था, जिसके बाद वे सिविल अस्पताल के स्पेशल वार्ड के कमरा नंबर 11 में भर्ती थे। बीती रात करीब 2 बजे ऑपरेशन के दर्द के कारण उनके पति को नींद नहीं आ रही थी और उषा भी उनके पास जाग रही थीं। इसी दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने बाहर से आकर उनके कमरे के दरवाजे को ताला लगा दिया और उन्हें अंदर ही बंद कर दिया।

बाहर से आई मर्दाना आवाज, पर नहीं खुला दरवाजा

उषा भरी ने बताया कि जब उन्हें कमरे के बाहर किसी संदिग्ध हलचल का अहसास हुआ, तो उन्होंने अंदर से आवाज लगाई, "बाहर कौन है? दरवाजा खोलो।" इस पर बाहर से एक मर्दाना आवाज आई, "खोलता हूँ।" लेकिन इसके बावजूद किसी ने दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद वह घबरा गईं। एक तरफ कमरे का दरवाजा बाहर से लॉक था और दूसरी तरफ उनके पति बेड पर गंभीर दर्द से बुरी तरह तड़प रहे थे, लेकिन चाहकर भी वे डॉक्टर या नर्स को बुलाने बाहर नहीं जा सकीं।

आधी रात को तड़पते रहे, सुबह 4 बजे कौंसिलर ने आकर बचाया

पीड़ित महिला ने बताया कि उन्होंने मदद के लिए अंदर से दरवाजे को बहुत जोर-जोर से खटखटाया और आवाजें दीं, लेकिन अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों या स्टाफ ने कोई सुध नहीं ली। आखिरकार, कोई रास्ता न बचता देख बेबस महिला ने सुबह करीब 4 बजे वार्ड नंबर 25 के नगर कौंसिलर (पार्षद) नवीन कौशल को फोन लगाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कौंसिलर नवीन कौशल तुरंत खुद सिविल अस्पताल पहुंचे और उन्होंने कमरे की कुंडी खोलकर अंदर बंद परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला।

दरवाजा खुलने के बाद जब उषा भरी अपने तड़पते पति के इलाज के लिए ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के पास पहुंचीं। महिला के अनुसार, जब उन्होंने स्टाफ से पूछा कि आवाज देने पर भी कोई क्यों नहीं आया, तो स्टाफ ने माना कि उन्हें दरवाजा खटखटाने की आवाज तो आ रही थी, लेकिन उन्होंने कहा, "रात के समय केवल लेडीज स्टाफ ही ड्यूटी पर था। हमें लगा कि कोई बाहरी व्यक्ति अस्पताल का गेट खटखटा रहा है। डर के मारे हम अपनी जगह से नहीं हिले कि कहीं हमारे साथ कोई अनहोनी घटना न हो जाए।" उषा भरी ने कहा कि मरीज सरकारी अस्पताल के स्पेशल रूम में पैसे देकर भी सुरक्षित नहीं है, तो वह पूरी तरह 'असुरक्षित' महसूस करेगा। उन्होंने अस्पताल के भीतर फैली गंदगी और खराब सफाई व्यवस्था को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग को आड़े हाथों लिया।

एस.एम.ओ. का पक्ष: मामले की जांच की जाएगी

इस बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले को लेकर जब अस्पताल की एस.एम.ओ. डॉक्टर इंदु से संपर्क किया गया, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके पास इस घटना को लेकर लिखित रूप में कोई आधिकारिक शिकायत नहीं आई है। हालांकि, मामला उनके संज्ञान में आया है और वे खुद इसकी जांच करेंगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि रात के समय क्या घटनाक्रम हुआ था और स्टाफ की तरफ से क्या लापरवाही रही, इसका पूरा पता लगाया जाएगा।

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