मकर संक्रांति पर कब खानी है खिचड़ी? जानें ज्योतिषों ने क्या बताया

Edited By Kalash,Updated: 13 Jan, 2026 05:25 PM

makar sankranti

इस बार मकर संक्रांति पर ऐसा संयोग बन गया है जिसने श्रद्धालुओं को कन्फ्यूजन में डाल दिया है।

सुल्तानपुर लोधी (धीर): इस बार मकर संक्रांति पर ऐसा संयोग बन गया है जिसने श्रद्धालुओं को कन्फ्यूजन में डाल दिया है। दरअसल 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी भी है। शास्त्रों में एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया है तो वहीं मकर संक्रांति पर चावल और दाल की खिचड़ी का सेवन जरूर किया जाता है। ऐसे में हर कोई इस चीज को लेकर कन्फ्यूजन में है कि इस दिन खिचड़ी का सेवन करें या नहीं। चलिए आपकी इस दुविधा को दूर करते हुए बताते हैं कि इस दिन क्या करना रहेगा सही।

ज्योतिष विशेषज्ञों पंडित दिनेश शर्मा और पंडित संजय शर्मा पचोरी के अनुसार ऐसा संयोग 2003 में भी बना था और अब 23 साल बाद फिर से ऐसा हुआ है जब एकादशी और संक्रांति एक साथ पड़ गए हैं। जब भी ऐसा संयोग बनता है तो सबसे पहले ये देखा जाता है कि उस दिन एकादशी तिथि कितने बजे तक रहेगी। पंचांग अनुसार माघ कृष्ण पक्ष की एकादशी 14 जनवरी की शाम 5 बजकर 52 मिनट पर खत्म हो रही है। ऐसे में एकादशी तिथि के समाप्त होने पर चावल की खिचड़ी का सेवन और दान किया जा सकता है। इससे कोई दोष नहीं लगेगा।

ज्योतिष विशेषज्ञों का ये भी कहना है कि सनातन परंपरा में शुभतिथियां और त्योहार किसी भी तरह के नियम और बाध्यता से मुक्त होते हैं। यही कारण है कि त्योहारों पर कोई भी शुभ कार्य बिना किसी संदेह के पूरा किया जा सकता है। ऐसे मे इस दिन बिना किसी टेंशन के मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा सकता है और खिचड़ी का सेवन भी कर सकते हैं। मकर संक्रांति के दिन श्रद्धालु सुबह पवित्र नदी के जल से स्नान करते हैं और फिर इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। फिर चावल, काली उड़द दाल, तिल और गुड़ का दान किया जाता है। इस दिन खिचड़ी का सेवन जरूर किया जाता है तो वहीं उत्तर भारत में कई जगहों पर इस दिन दही-चूड़ा खाने की भी विशेष परंपरा है।

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