Edited By Kalash,Updated: 19 Jul, 2026 01:26 PM

हल्का नॉर्थ के अंतर्गत आते जस्सियां क्षेत्र में नगर निगम के 'स्वच्छ लुधियाना' के दावों की सरेआम धज्जियां उड़ रही हैं।
लुधियाना (राज): हल्का नॉर्थ के अंतर्गत आते जस्सियां क्षेत्र में नगर निगम के 'स्वच्छ लुधियाना' के दावों की सरेआम धज्जियां उड़ रही हैं। यहां जस्सियां इलाके में कूड़े के बढ़ते ढेर और निगम अधिकारियों की नालायकी आम जनता और गरीब दुकानदारों पर भारी पड़ रही है। हैरत की बात यह है कि निगम यहां के फड़ी विक्रेताओं से हर महीने ₹1500 की मोटी पर्ची काट रहा है और सफाई के नाम पर रोजाना अलग से जेब ढीली करवाई जा रही है, लेकिन इसके बावजूद गरीब दुकानदार कूड़े के पहाड़ों और नरकीय बदबू के बीच बैठकर सब्जियां बेचने को मजबूर हैं। निगम की इस दोहरी मार और लाचारी को लेकर स्थानीय जनता में भारी रोष व्याप्त है।
₹1500 की पर्ची और ₹20 रोज़ाना का हफ्ता... फिर भी नरक में कट रही जिंदगी!
जस्सियां चौक के पास लगने वाली सब्जी मंडी के फड़ी विक्रेता बाल किशन पप्पी, दर्शन साहनी और पिंकी देवी ने रोष जताते हुए निगम की पोल खोल कर रख दी। उन्होंने बताया कि वे वर्षों से यहां फड़ी लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। नगर निगम की ओर से उनसे हर महीने ₹1500 की फड़ी की पर्ची वसूली जाती है। हद तो तब हो जाती है जब इसके अलावा भी सफाई कर्मचारियों को रोजाना ₹20 प्रति फड़ी के हिसाब से अलग से देने पड़ते हैं। इतनी वसूली के बावजूद सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी है। गंदगी और भयंकर बदबू के कारण अब ग्राहक भी इस मंडी में आने से कतराने लगे हैं, जिससे इन गरीब दुकानदारों के आगे भूखे मरने की नौबत आ गई है।
कमिश्नर से लेकर जोन-A दफ्तर तक शिकायतें फुस्स, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो
स्थानीय निवासी अमन गुप्ता, तरसेम सिंह और राजन कुमार ने बताया कि जस्सियां में लगे कूड़े के इस अघोषित डंप को हटाने के लिए एक सामाजिक संस्था के बच्चे पिछले कई दिनों से लगातार संघर्ष कर रहे हैं। संस्था की ओर से नगर निगम के जोन-ए (Zone-A) कार्यालय से लेकर सीधे नगर निगम कमिश्नर तक को लिखित और ऑनलाइन शिकायतें भेजी जा चुकी हैं। सोशल मीडिया पर इस गंदगी के पहाड़ों की तस्वीरें और वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहे हैं, लेकिन कुंभकर्णी नींद सो रहा निगम प्रशासन टस से मस होने को तैयार नहीं है।
कुर्सी मिलते ही बदले पार्षद के सुर; विपक्ष में रहते जो 'डंप' आफत था, अब उस पर साधी चुप्पी!
इस पूरे मामले में स्थानीय निवासियों ने वर्तमान पार्षद पर भी तीखा निशाना साधा है। लोगों ने आरोप लगाया कि जब मौजूदा पार्षद विपक्ष में थे, तब उन्होंने अखबारों की सुर्खियां बटोरने और राजनीति चमकाने के लिए इसी कूड़ा डंप को हटाने के लिए यहां बड़ा धरना प्रदर्शन किया था। लेकिन अब जब वे खुद सत्ता की मलाई चाट रहे हैं, तो इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान करना तो दूर, उन्होंने इस ओर देखना भी बंद कर दिया है।
अंदरूनी राजनीतिक खींचतान और कॉलोनी का विवाद... जनता बन रही 'बलि का बकरा'
जस्सियां इलाके में इस कूड़ा डंप को न हटाए जाने के पीछे एक गहरी राजनीतिक खींचतान की भी चर्चा सरेबाजार गर्म है। दबी जुबान में स्थानीय लोगों का कहना है कि पास ही में विकसित हो रही एक नई अवैध/वैध कॉलोनी और स्थानीय रसूखदार नेताओं के बीच चल रहे आपसी विवाद और ईगो-वार के कारण जान बूझकर यहां कूड़ा डंप किया जा रहा है ताकि एक-दूसरे को नीचा दिखाया जा सके। हालांकि, इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है और निगम अधिकारियों ने इस राजनीतिक विवाद पर पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है।
अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here