Ludhiana: शहर की सरहदों पर लगा 'ब्रेक', 110 गांवों का शहर बनने का सपना टूटा, पढ़ें पूरा मामला

Edited By Kamini,Updated: 29 Apr, 2026 11:51 AM

ludhiana municipal corporation limits expansion plan put on hold

औद्योगिक नगरी लुधियाना को नई पहचान और विकास को नई उड़ान देने वाली निगम सीमा विस्तार की योजना पर फिलहाल सरकार ने 'फुल स्टॉप' लगा दिया है।

लुधियाना (राज): औद्योगिक नगरी लुधियाना को नई पहचान और विकास को नई उड़ान देने वाली निगम सीमा विस्तार की योजना पर फिलहाल सरकार ने 'फुल स्टॉप' लगा दिया है। करीब 3 दशकों के लंबे इंतजार के बाद शहर के साथ लगते 110 गांवों को नगर निगम की सीमा में शामिल करने का जो खाका तैयार किया गया था, वह ठंडे बस्ते में चला गया है।

सरकार ने इस प्रस्ताव को रद कर दिया है, जिससे बिरमी, मलकपुर, दाखा, अयाली कलां और भटिट्टयां जैसे दर्जनों गांवों के लाखों लोगों की शहरी सुविधाओं की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। आखिरी बार शहर की सीमाएं साल 1995 में बढ़ाई गई थीं और तब से शहर की आबादी तो बढ़ी, लेकिन सरहदें वहीं की वहीं थमी हुई हैं। दरअसल, इस पूरी योजना के धराशायी होने के पीछे 'देरी' सबसे बड़ा कारण बनकर उभरी है। नगर निगम के जनरल हाउस ने 26 दिसंबर 2025 को इन 110 गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव पास कर सरकार की मंजूरी के लिए भेजा था। लेकिन केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक, सीमा विस्तार की तमाम प्रक्रिया पूरी करने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2025 तय की गई थी। 

प्रस्ताव भेजने और उस पर नोटिफिकेशन जारी करने के बीच का समय इतना कम था कि औपचारिकताएं पूरी नहीं हो सकीं और समय सीमा निकल गई। अब जनगणना की प्रक्रियाओं के चलते अगले दो वर्षों के लिए शहरों की सीमाओं को पूरी तरह से 'फ्रीज' कर दिया गया है, यानी अब दो साल तक सीमा विस्तार की कोई गुंजाइश नहीं बची है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता, तो लुधियाना शहर का नक्शा पूरी तरह बदल जाता। 

शहर का क्षेत्रफल 200 वर्ग किलोमीटर से दोगुना होकर 400 वर्ग किलोमीटर हो जाता और ग्रीन एक्सप्रेसवे के भीतर आने वाले इन गांवों को सड़कों, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट जैसी बेहतर शहरी सुविधाएं मिलनी शुरू हो जातीं। ताज्जुब की बात यह है कि पिछले सालों में निगम के वार्डों की संख्या तो बार-बार बढ़ाई गई-1997 में 50 से 70, फिर 75 और 2017 में 95 वार्ड किए गए, लेकिन शहर का क्षेत्रफल बढ़ाने का मुद्दा हर बार फाइलों में ही दबा रहा। इस बार जब कोशिश हुई, तो वक्त की कमी ने विकास की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। अब इन 110 गांवों के बाशिंदों को शहर का हिस्सा बनने के लिए एक लंबा इंतजार करना होगा।

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