लुधियाना बन रहा हवाला नेटवर्क का गढ़, साइबर ठगी से ISI जासूसी तक जुड़े तार

Edited By Kalash,Updated: 08 Sep, 2026 12:21 PM

ludhiana emerging as a hub for hawala networks

पंजाब की आर्थिक राजधानी कहा जाने वाला औद्योगिक महानगर लुधियाना इन दिनों अंतरराष्ट्रीय व अंतरराज्यीय अवैध हवाला नेटवर्कों के बड़े गढ़ के रूप में सुर्खियों में आ गया है।

लुधियाना (राज): पंजाब की आर्थिक राजधानी कहा जाने वाला औद्योगिक महानगर लुधियाना इन दिनों अंतरराष्ट्रीय व अंतरराज्यीय अवैध हवाला नेटवर्कों के बड़े गढ़ के रूप में सुर्खियों में आ गया है। साइबर फ्रॉड, क्रिकेट सट्टेबाजी से लेकर देश विरोधी सैन्य जासूसी जैसे संगीन मामलों की जांच में लगातार हवाला चैनलों की मौजूदगी उजागर हो रही है। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और पंजाब पुलिस द्वारा समय-समय पर गिरोहों के प्यादों को दबोचने के बावजूद यह अवैध तंत्र बेखौफ फल-फूल रहा है। जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क की वास्तविक ‘बड़ी मछलियां’ कानून के शिकंजे से बाहर हैं, जिसके चलते हवाला ऑपरेटर खुलेआम अपने पांव पसार रहे हैं।

साइबर फ्रॉड का सबसे बड़ा गिरोह, मिलरगंज के ऑपरेटरों से दिल्ली-गुजरात ट्रांसफर  

मई महीने में कमिश्नरेट पुलिस ने अब तक के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 132 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें लुधियाना के मिलरगंज इलाके से संचालित 3 हवाला ऑपरेटर भी शामिल थे। यह सिंडिकेट विदेशी नागरिकों को फर्जी बैंक सिक्योरिटी अलर्ट और रिमोट सॉफ्टवेयर के झांसे में लेकर हर महीने करीब 35 करोड़ रुपये ऐंठता था। पुलिस पड़ताल में सामने आया कि ठगी की कुल रकम का 40 प्रतिशत हिस्सा मिलरगंज के हवाला ऑपरेटरों के माध्यम से देश में लाया जाता था, जिसे बाद में दिल्ली और गुजरात में बैठे मुख्य साजिशकर्ताओं तक पहुंचाया गया। पुलिस ने इस मामले में 16 करोड़ रुपये की रकम वाले 300 से अधिक म्यूल बैंक खाते भी फ्रीज किए थे। इसके बाद जून में भी 11 हवाला कारोबारियों को दबोचा गया, जो फर्जी फर्में और जाली रसीदें बनाकर अवैध वित्तीय लेनदेन चला रहे थे।

आई.एस.आई. नेटवर्क तक पहुंची हवाला फंडिंग, दुबई के जरिए भेजी गई रकम 

अगस्त 2026 में लुधियाना पुलिस द्वारा बद्दोवाल स्थित 17 फील्ड एम्युनिशन डिपो के पास से गिरफ्तार किए गए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ढ्ढस्ढ्ढ के एजेंट रशपाल सिंह और उसके साथियों (रोहित मसीह व वरिंदर मसीह) के मामले में भी सनसनीखेज तथ्य सामने आए हैं। जांच में खुलासा हुआ कि फिरोजपुर रोड पर डिपो से महज 6 किमी दूरी पर दुकान किराए पर लेकर जासूसी करने वाले रशपाल को दुबई में बैठे हवाला ऑपरेटरों के जरिए 3 से 4 लाख रुपये की फंडिंग पहुंचाई गई थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान में बैठे आई.एस.आई. हैंडलर पंजाब में जासूसों की भर्ती और उन्हें सक्रिय रखने के लिए इसी हवाला तंत्र का इस्तेमाल कर रहे हैं।

आईपीएल सट्टेबाजी और गरीबों के खातों का दुरुपयोग 

क्रिकेट व आईपीएल सट्टेबाजी सिंडिकेट भी अपनी अवैध कमाई को सुरक्षित ठिकाने लगाने के लिए लुधियाना के हवाला नेटवर्क पर निर्भर हैं। पुलिस ने हाल ही में ऐसे कई कूरियर पकड़े जो गरीब और जरूरतमंद लोगों को 10 से 20 हजार रुपये का लालच देकर उनके पहचान पत्रों पर म्यूल बैंक खाते खुलवाते थे। इन बैंक खातों और पहचान पत्रों की आड़ में करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई, जबकि सट्टे के मुख्य सरगना अब भी पकड़ से बाहर हैं।

हवाला कारोबार बढ़ने की मुख्य वजह, सख्त कानून की कमी 

प्रवर्तन निदेशालय (ई.डी.) के पूर्व उप निदेशक निरंजन सिंह ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताते हुए स्पष्ट किया कि दशकों पहले जहां हवाला का दायरा कुछ लाख रुपये तक सीमित था, वहीं आज यह हजारों करोड़ का संगठित उद्योग बन चुका है। उन्होंने कानूनी पहलुओं पर रोशनी डालते हुए बताया साल 2000 से पहले लागू फेरा (एफ.ई.एम.ए.) कानून बेहद सख्त था, लेकिन फेमा (एफ.ई.एम.ए.) एक दीवानी कानून है। इसमें केवल जुर्माना या संपत्ति जब्ती का प्रावधान है, गिरफ्तारी की सीधी शक्ति नहीं है। पहले तस्करों व हवाला संचालकों पर कोफेपोसा के तहत कम से कम एक साल की हिरासत की कार्रवाई होती थी, जिसका अब हर मामले में इस्तेमाल नहीं किया जाता। निरंजन सिंह का कहना है कि सरकारों द्वारा हवाला नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक व प्राथमिकता के आधार पर सख्त कदम न उठाए जाने के कारण यह अवैध जाल गहराता जा रहा है, जो देश की अर्थव्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

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