Edited By Sunita sarangal,Updated: 25 May, 2026 02:53 PM

इस अचानक हुई मूल्य वृद्धि के बाद शराब के उपभोक्ताओं में भारी निराशा और आक्रोश देखा जा रहा है।
अमृतसर(इन्द्रजीत): पंजाब के अमृतसर जिले में बीते कुछ दिनों से शराब के दामों में चल रही 'प्राइस वॉर' पर अचानक विराम लग गया है। शराब के ठेकेदारों के बीच करीब एक महीने पुराना विवाद सुलझने और आपसी "पुल" दोबारा जुड़ने के कारण अमृतसर शहर में शराब की कीमतें एक बार फिर आसमान छूने लगी हैं। इस समझौते के बाद शराब के दामों में 30 से 40 प्रतिशत तक का भारी उछाल आया है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा है।
इस अचानक हुई मूल्य वृद्धि के बाद शराब के उपभोक्ताओं में भारी निराशा और आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय खरीदारों का कहना है कि यह सीधा-सीधा उपभोक्ताओं की जेब पर डाका है। जब ठेकेदारों में प्रतिस्पर्धा थी, तब उन्हें कम और किफायती दामों पर बढ़िया और ब्रांडेड शराब मिल रही थी। लेकिन अब सिंडीकेट बनते ही कीमतें इतनी बढ़ा दी गई हैं कि जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि अब ज्यादा पैसे खर्च करने के बाद भी गुणवत्ता से समझौता करना पड़ रहा है और घटिया स्तर की शराब मिल रही है।
क्या था पूरा विवाद और क्यों गिरे थे दाम?
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक अमृतसर में शराब के कुल 12 ग्रुप हैं, जिन पर मुख्य रूप से 3 बड़े ठेकेदारों का एकाधिकार है। इनमें से:
∆ प्रथम ठेकेदार : 08 ग्रुप पर कब्जा।
∆ द्वितीय ठेकेदार : 03 ग्रुप पर कब्जा।
∆ तृतीय ठेकेदार : 01 ग्रुप पर कब्जा।
करीब एक महीना पहले इन ठेकेदारों के बीच आपसी तालमेल (पूल) टूट गया था। बाजार में हिस्सेदारी और वर्चस्व की इस जंग के कारण ठेकेदारों ने ग्राहकों को लुभाने के लिए कीमतों में भारी कटौती कर दी थी। कीमतें 40% तक गिर जाने के कारण ठेकेदारों को वित्तीय तौर पर काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था, लेकिन इसका सीधा फायदा शराब के शौकीनों को मिल रहा था। शराब के हर ठेके पर कम रेटों की लिस्टें लग गई थीं, जिसके कारण लोगों ने सस्ते रेट पर खूब खरीददारी की। अब आने वाले समय में शराब के ठेकेदारों को नए रेटों पर मंदी का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि आम खपतकारों के पास अभी तक सस्ते रेट का स्टॉक बाकी है।
आबकारी विभाग की मध्यस्थता से हुई 'दोस्ती'!
बीते 3-4 दिनों के भीतर अमृतसर के इस शराब कारोबार में एक बड़ा नाटकीय मोड़ आया। आपसी दुश्मनी अचानक 'दोस्ती' में बदल गई। सूत्रों का दावा है कि इस पूरे गतिरोध को समाप्त करने में आबकारी विभाग के कुछ उच्च अधिकारियों ने मुख्य भूमिका निभाई है।
अधिकारियों की मध्यस्थता में दोनों गुटों के बीच एक गुप्त समझौता करवाया गया, जिसके बाद ठेकेदारों का टूटा हुआ सिंडीकेट फिर से बहाल हो गया। नतीजा यह हुआ कि शराब की कीमतें तुरंत प्रभाव से उसी दर पर पहुंच गईं, जो अप्रैल महीने की शुरुआत में लागू थीं। सूत्रों की मानें तो यदि इन शराब के ठेकेदारों का समझौता न होता तो सरकार का रैवेन्यू भी प्रभावित हो सकता था।
समझौते के पीछे करोड़ों के राजस्व और मुनाफे का खेल
विशेषज्ञों का मानना है कि ठेकेदारों की इस आपसी 'नूराकुश्ती' और फिर अचानक हुए समझौते के पीछे करोड़ों रुपए के राजस्व और मुनाफे का खेल है। आबकारी विभाग की इस मामले में चुप्पी भी कई गंभीर सवाल खड़े करती है कि आखिर उपभोक्ताओं के हितों को ताक पर रखकर इस एकाधिकार (मोनोपली) को दोबारा शह क्यों दी गई?
पीने वालों को फिलहाल कोई राहत नहीं!
फिलहाल, अमृतसर में शराब के शौकीनों के लिए 'सस्ते दिनों' की राहत खत्म हो चुकी है और उन्हें अब अप्रैल महीने वाले पुराने महंगे रेट ही चुकाने होंगे।
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