खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाना गलत नहीं: जत्थेदार हरप्रीत सिंह

Edited By Mohit,Updated: 06 Jun, 2020 08:27 PM

jathedar harpreet singh

पंजाब के अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह...........

अमृतसरः पंजाब के अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने शनिवार को कहा कि वह खालिस्तान की मांग कर रहे सिख युवकों की ओर से खालिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करने को गलत नहीं समझते। जत्थेदार सिंह ने छह जून 1984 में अकाल तख्त साहिब पर हुई सैनिक कार्रवाई के संबंध में आयोजित समारोह के पश्चात पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि केन्द्र सरकारों की नीतियां हमेशा सिख विरोधी रही हैं। उन्होंने आज के दिन को सिख इतिहास में काला दिवस करार देते हुए कहा इस दिन को सिख कौम कभी भुला नहीं सकेगी।

उन्होंने कहा कि छह जून 1984 में श्री अकाल तख्त साहिब पर सैनिक कार्रवाई के अतिरिक्त लगभग 37 गुरुद्वारों पर हमले हुए थे। उन्होने कहा कि सैनिक कार्रवाई में सिखों के कई जरनैल मारे गए। उन्होंने कहा कि जिस लक्ष्य के लिए इन लोगों ने अपने प्राण गंवाये उन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए समूची सिख कौम को राष्ट्रीय मंथन करने के लिए एक साथ आने की जरूरत है। खालिस्तान की मांग संबंधी एक सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर केन्द्र सरकार खालिस्तान देगी तो हमारे लिए ऐसा ही होगा जैसे ‘अंधे को क्या चाहिए दो आंखें' अर्थात वह इसे सहर्ष स्वीकार करेंगे। समारोह में खालिस्तान संबंधी नारों पर उन्होंने कहा कि अगर सिख युवक समारोह के बाद खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाते हैं तो इसे वह हर्ज ही क्या है।

जत्थेदार ने कहा कि अकाल तख्त पर हुई सैनिक कार्रवाई के इतिहास को कलमबद्ध करना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि अब तक कई इतिहासकारों ने इस संबंध में किताबें लिखी हैं लेकिन इसमें कई खामियां हो सकती हैं। उन्होंने शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) को कहा कि वह 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के इतिहास को लिखने के लिए विशेषज्ञों का पैनल गठित करे तथा सैनिक कार्रवाई के गवाहों से जानकारी लेकर इसे कलमबद्ध करें।

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