Edited By Urmila,Updated: 12 Oct, 2026 04:41 PM

भारत भर में आजकल टूरिज्म का धंधा जोरों पर चल रहा है। इसी कारोबार को देखते हुए मलोट में भी टूर ऑपरेटर कुकुरमुत्तों की तरह उग आए हैं और धड़ल्ले से टूर ऑपरेटिंग का धंधा कर रहे हैं।
मलोट (गोयल) : भारत भर में आजकल टूरिज्म का धंधा जोरों पर चल रहा है। इसी कारोबार को देखते हुए मलोट में भी टूर ऑपरेटर कुकुरमुत्तों की तरह उग आए हैं और धड़ल्ले से टूर ऑपरेटिंग का धंधा कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि इस कारोबार से सरकार को मिलने वाला जीएसटी आखिर कहां जा रहा है? आरोप है कि कई टूर ऑपरेटर अपने पैकेज बेचकर मोटी रकम तो वसूल रहे हैं, लेकिन नियमानुसार जीएसटी जमा करने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इन टूर ऑपरेटरों के पैकेज में आने-जाने का किराया, होटल या धर्मशाला में ठहरना, खाना-पीना और यात्रा से जुड़ी अन्य सुविधाएं शामिल होती हैं। एक-एक व्यक्ति से करीब 15 हजार रुपये तक वसूले जाते हैं। इस तरह एक ही यात्रा में बड़ी रकम का कारोबार होता है, लेकिन इस पर लागू जीएसटी सरकार के खजाने में जमा हो रहा है या नहीं, यह जांच का विषय है। हैरानी की बात यह है कि यदि यह कारोबार कई वर्षों से चल रहा है, तो जीएसटी विभाग की नजर अब तक इस पर क्यों नहीं पड़ी? क्या लाखों रुपये का कारोबार करने वाले इन ऑपरेटरों के जीएसटी रिकॉर्ड की जांच नहीं होनी चाहिए?
ट्रैवल कारोबार पर लागू जीएसटी की दरें कारोबार की प्रकृति और अपनाई जा रही व्यवस्था के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। यदि कोई ऑपरेटर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेता है, तो संबंधित शर्तों के तहत 18 प्रतिशत जीएसटी लागू हो सकता है। मिली जानकारी के अनुसार, कुछ ऑपरेटर एक-एक यात्रा के पैकेज में पांच लाख रुपये से अधिक की रकम लेकर पर्यटकों को यात्रा पर ले जा रहे हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि नियमानुसार जीएसटी जमा नहीं किया जा रहा, तो सरकारी खजाने को कितना नुकसान हो सकता है। हालांकि, वास्तविक कर देनदारी और कथित चोरी का पता कारोबार के रिकॉर्ड की जांच के बाद ही चल सकता है।
एक तरफ पंजाब सरकार जीएसटी चोरी पर अंकुश लगाने के लिए ‘बिल लाओ, इनाम पाओ’ जैसी योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी तरफ मलोट में लाखों रुपये के टूर पैकेज बेचने वाले कुछ टूर ऑपरेटरों के जीएसटी अनुपालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आम दुकानदारों के बिलों पर नजर रखने वाले विभाग को लाखों रुपये का कारोबार करने वाले इन टूर ऑपरेटरों के कारोबार की जांच करने की जरूरत क्यों महसूस नहीं हुई? यदि इनका सालाना कारोबार निर्धारित सीमा से अधिक है और ये नियमानुसार जीएसटी जमा नहीं कर रहे, तो यह गंभीर मामला है। सवाल सीधा है । क्या जीएसटी विभाग इन टूर ऑपरेटरों के कारोबार की जांच करेगा, या फिर यात्रा के नाम पर जीएसटी चोरी का यह खेल इसी तरह धड़ल्ले से चलता रहेगा? विभाग को मामले की जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
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