Edited By Subhash Kapoor,Updated: 10 May, 2026 08:11 PM

पूर्व उपमुख्यमंत्री और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने आरोप लगाया कि पंजाब के इतिहास में सबसे भयावह और दर्दनाक बठिंडा के मौड़ मंडी में बम धमाके के जख्म आज भी हरे हैं। इन जख्मों पर मरहम लगाने और बम धमाके के आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा...
जालंधर : पूर्व उपमुख्यमंत्री और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने आरोप लगाया कि पंजाब के इतिहास में सबसे भयावह और दर्दनाक बठिंडा के मौड़ मंडी में बम धमाके के जख्म आज भी हरे हैं। इन जख्मों पर मरहम लगाने और बम धमाके के आरोपियों की गिरफ्तारी का दावा करने वाले मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और स्पीकर कुलतार सिंह संधवां पर साढे चार साल बाद भी इस मामले में पीड़ितों को इंसाफ नहीं दिला पाए हैं।
इस केस के सभी मुख्य आरोपियों गुरतेज सिंह, अवतार सिंह और अमरीक सिंह अभी भी पुलिस गिरफ्त से कोसों दूर है। सरकार यह भी पता नहीं लगा पाई है इस बलास्ट में इस्तेमाल होने वाला विस्फोटक पदार्थ कहां से लाया गया था, क्योंकि पंजाब के 25 साल के इतिहास में ऐसा भयावह बलास्ट नहीं हुआ, जिसमें एक साथ इतने लोगों की जान गई हो। इसकी आज तक गंभीरता से जांच नहीं की गई है। सरकारी एजेंसियां यह पता लगाने में बुरी तरह फेल साबित हुई है।
उन्होंने सीएम मान और स्पीकर संधवां से पूछा है कि क्या इन पीड़ित परिवारों को कभी इंसाफ मिलेगा या नहीं? सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इतने संवेदनशील मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई और आरोपी गिरफ्त से बाहर क्यों हैं? 2020 में पहली बार एसआईटी ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख के समधी हरमंदिर सिंह जस्सी को जांच में शामिल किया गया था, उसके बाद कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। इस मामले में डेरा प्रमुख से पूछताछ भी नहीं की गई, जोकि सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करती है। पंजाब सरकार को इस मामले में हाईकोर्ट से भी फटकार लग चुकी है।
रंधावा ने आरोप लगाया कि 31 जनवरी 2017 को हुए इस दर्दनाक बम धमाके के नौ साल बाद भी आरोपियों की आज तक गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। 2022 की आम आदमी पार्टी की सरकार बनने से पहले हर स्टेज पर मान और संधवां इस बलास्ट के आरोपियों को सजा दिलाने का दावा करते आ रहे थे, लेकिन सत्ता संभालने के बाद उनकी सरकार ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
रंधावा ने कहा कि मौड़ बलास्ट में ढिलमुल रवैया पंजाब की कानून व्यवस्था और जांच तंत्र की गंभीर नाकामी को दर्शाता है। ऐसा न होना पंजाब सरकार और जांच एजेंसियों पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि इस विस्फोट में पांच मासूम बच्चों समेत सात लोगों की जान चली गई थी, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
उन्होंने कहा कि धमाके में सात लोगों जपसिमरण सिंह (14), रिपनदीप सिंह (11), सौरभ सिंगला (13), अंकुश इंसा, अशोक, बरखा और हरपाल पाली की मौत हो गई थी। यह घटना पूरे पंजाब को झकझोर देने वाली थी, लेकिन पीड़ित परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। लेकिन सरकार राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर नहीं उठ पाई है।
रंधावा ने कहा कि आतंक और हिंसा से जुड़े मामलों में देरी से न्याय मिलना लोगों के विश्वास को कमजोर करता है। उन्होंने मांग की कि पंजाब सरकार इस मामले की जांच को तेज करे और फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर पीड़ित परिवारों को इंसाफ दिलाया जाए। पंजाब में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में सख्त और समयबद्ध कार्रवाई जरूरी है।