पंजाब में ऑनलाइन लाइसेंस बना आफत, वाहन चालकों में मची हाहाकार

Edited By Kalash,Updated: 08 Feb, 2026 11:33 AM

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पंजाब सरकार द्वारा आर.टी.ए. (रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी) की सेवाओं को ऑनलाइन और सेवा केंद्रों के ज़रिये आसान बनाने के दावे ज़मीनी हकीकत में उलझन और परेशानी का कारण बनते नज़र आ रहे हैं।

लुधियाना (राम): पंजाब सरकार द्वारा आर.टी.ए. (रीजनल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी) की सेवाओं को ऑनलाइन और सेवा केंद्रों के ज़रिये आसान बनाने के दावे ज़मीनी हकीकत में उलझन और परेशानी का कारण बनते नज़र आ रहे हैं। लुधियाना में हालात यह हैं कि एक हजार से ज्यादा लोग ड्राइविंग लाइसेंस और लर्निंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन कर चुके हैं, लेकिन न तो उन्हें लाइसेंस मिल रहा है और न ही कोई विभाग इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार है।

इन आवेदकों ने घर बैठे सरकारी पोर्टल पर आवेदन करते हुए 520 रुपये की फीस भी ऑनलाइन जमा करवाई, लेकिन अब महीनों से वे सेवा केंद्र और आर.टी.ए. कार्यालय के बीच चक्कर काटने को मजबूर हैं। दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।

पीड़ित आवेदक बिक्रमजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने दिसंबर महीने में लर्निंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। फीस जमा करने के बाद जब वह सेवा केंद्र पहुंचे तो उन्हें कहा गया कि ऑनलाइन आवेदन उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता और आर.टी.ए. से संपर्क करें। वहीं आर.टी.ए. कार्यालय में कर्मचारियों ने उन्हें दोबारा सेवा केंद्र भेज दिया।

पिछले एक महीने से वे लगातार दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं मिला। इसी तरह अर्चना सिंह ने भी बताया कि उन्होंने ऑनलाइन ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक न तो लाइसेंस जारी हुआ और न ही किसी अधिकारी ने स्पष्ट जवाब दिया।

इससे लोगों को न सिर्फ आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि उनका समय और मानसिक शांति भी प्रभावित हो रही है। इस मामले में ए.आर.टी.ओ. दीपक ठाकुर का कहना है कि ड्राइविंग लाइसेंस की सेवाएं सेवा केंद्रों के माध्यम से ही संचालित की जाती हैं। कई लोगों ने घर से ऑनलाइन आवेदन करते समय “कैंप मोड” विकल्प चुन लिया, जबकि उन्हें “आर.टी.ए.” या सेवा केंद्र विकल्प चुनना चाहिए था। कैंप मोड से जमा हुई फीस की फाइल आर.टी.ए. सिस्टम में खुल ही नहीं रही, जिस कारण उसे अप्रूव करना संभव नहीं है।

उन्होंने साफ कहा कि इस तकनीकी खामी का समाधान केवल पंजाब सरकार के स्तर पर ही हो सकता है। जब तक सरकार कोई निर्णय नहीं लेती, तब तक लोगों को सेवा केंद्र जाकर दोबारा फीस जमा करनी पड़ सकती है। ऑनलाइन आवेदन पर उनका कोई अधिकार नहीं है। ऑनलाइन आवेदन में सेवा केंद्र की फीस शामिल नहीं होती, इसलिए कर्मचारी ऐसी फाइलों पर काम नहीं करते।

अब सवाल यह उठता है कि जब सरकार खुद ऑनलाइन फीस ले रही है, तो उसकी जिम्मेदारी भी सरकार की ही बनती है। या तो सरकार उन लोगों की जमा की गई फीस वापस करे, या फिर सेवा केंद्रों के माध्यम से उनके लाइसेंस जारी करवाने की व्यवस्था करे।

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