Edited By Urmila,Updated: 19 Jun, 2026 05:37 PM

एक तरफ देश को डिजिटल बनाने और हर छोटे-बड़े लेन-देन को ऑनलाइन माध्यम से जोड़ने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी परिवहन प्रणाली अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रही है।
बरनाला (विवेक सिंधवानी, रवि) : एक तरफ देश को डिजिटल बनाने और हर छोटे-बड़े लेन-देन को ऑनलाइन माध्यम से जोड़ने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकारी परिवहन प्रणाली अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रही है। ऐसा ही एक मामला बरनाला डिपो की पी.आर.टी.सी. बस से सामने आया है, जहां 'गूगल पे' के जरिए टिकट के पैसे लेने को लेकर कंडक्टर और सवारी के बीच तीखी बहस हो गई। यह विवाद इतना बढ़ गया कि कंडक्टर ने बस को बीच रास्ते में ही रोक दिया, जिससे अन्य यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
'गूगल पे' मांगने पर हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, गुरप्रीत कोटली नाम का एक यात्री सुबह करीब 8 बजे तपा मंडी से बरनाला डिपो की पी.आर.टी.सी. बस में सवार हुआ था। जब कंडक्टर टिकट काटने आया, तो गुरप्रीत ने नकदी न होने के कारण टिकट का भुगतान 'गूगल पे' के जरिए करने की बात कही। कंडक्टर ने साफ इनकार करते हुए कहा कि बसों में ऑनलाइन भुगतान की कोई सुविधा नहीं है और सिर्फ नकद पैसे ही लिए जाएंगे। इस बात को लेकर दोनों के बीच बहस इतनी गरमा गई कि कंडक्टर ने बस को सड़क के बीच में ही खड़ा कर दिया।
सोशल मीडिया पर लाइव होकर निकाला गुस्सा
पीड़ित यात्री गुरप्रीत कोटली ने बस के अंदर से ही फेसबुक पर लाइव होकर पूरी घटना आम जनता के सामने रखी। वीडियो में बस की अन्य सवारियां भी इस मुद्दे पर दोफाड़ नजर आईं। कुछ यात्री गुरप्रीत के पक्ष में थे, तो कुछ बस रुकने के कारण हो रही देरी से परेशान थे। अंततः, माहौल शांत करने के लिए एक अन्य सहृदय यात्री ने आगे आकर गुरप्रीत की टिकट के पैसे नकद चुकाए, जिसके बाद ही बस आगे बढ़ सकी।
सरकारी हैल्पलाइन नंबर निकले बंद
गुरप्रीत कोटली ने सरकारी तंत्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बहस के दौरान उन्होंने शिकायत दर्ज कराने के लिए पी.आर.टी.सी. की आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए तमाम नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन एक भी फोन नंबर नहीं मिला। उन्होंने रोष जताते हुए सवाल उठाया कि अगर देश सचमुच 'डिजिटल इंडिया' की ओर बढ़ रहा है, तो सरकारी बसों में अब तक एक क्यू.आर. कोड स्कैनर क्यों नहीं लगाया जा सका? इस घटना ने सरकार के डिजिटलाइजेशन के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
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