पंजाब में उच्च शिक्षा पर संकट, एयूसीटी ने डायरेक्टर से की अहम बैठक

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 02 Apr, 2026 05:22 PM

crisis in higher education in punjab auct holds key meeting with director

पंजाब में उच्च शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर एयूसीटी (ऑल यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स) ने डायरेक्टर उच्च शिक्षा के साथ अहम बैठक की। संगठन के प्रधान प्रो. तरुण घई और महासचिव प्रो. जसपाल सिंह ने शिक्षकों से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए और जल्द समाधान की...

लुधियाना (विक्की) : पंजाब में उच्च शिक्षा के गिरते स्तर को लेकर एयूसीटी (ऑल यूनिवर्सिटी एंड कॉलेज टीचर्स) ने डायरेक्टर उच्च शिक्षा के साथ अहम बैठक की। संगठन के प्रधान प्रो. तरुण घई और महासचिव प्रो. जसपाल सिंह ने शिक्षकों से जुड़े कई गंभीर मुद्दे उठाए और जल्द समाधान की मांग की। प्रो. घई ने बताया कि लंबे समय से कॉलेजों के प्रोफेसर कई समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिससे शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

बैठक में उठाए गए प्रमुख मुद्दे:

प्रिंसिपल सचिव, उच्च शिक्षा पंजाब के आदेशों के अनुसार बनी जांच कमेटी की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट (मेमो नंबर 2022217251, दिनांक 16/08/2022) में अयोग्य करार दिए गए आठ प्रिंसिपल अभी भी अपने पदों पर बने हुए हैं। इससे एक ओर कॉलेजों के अकादमिक और प्रशासनिक स्तर में गिरावट आ रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी खजाने से उन्हें हर महीने लाखों रुपये वेतन के रूप में दिए जा रहे हैं। इस स्थिति को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

09.01.2026 को डायरेक्टर उच्च शिक्षा पंजाब द्वारा सभी प्राइवेट एडेड कॉलेजों के प्रिंसिपलों को आदेश दिया गया था कि वे अपने एडेड और अनएडेड शिक्षकों को 7वें वेतन आयोग (28.09.2022 से लागू) के लाभ देने संबंधी प्रमाण पत्र जमा करवाएं। लेकिन हकीकत यह है कि कई प्राइवेट कॉलेज प्रबंधन ने अभी तक अनएडेड शिक्षकों को 42% डीए, 16% एचआरए, मेडिकल भत्ता और पीएफ जैसे लाभ नहीं दिए हैं। यह कानूनन सभी शिक्षकों को समान रूप से मिलना चाहिए, इसलिए आदेशों का पालन न करने वाले प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

पूर्व शिक्षा मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर के कार्यकाल में एयूसीटी से प्रस्ताव मांगा गया था कि कॉलेजों में खाली पड़े एडेड पदों पर अनएडेड शिक्षकों को कन्वर्ट किया जाए। यह प्रस्ताव तीन साल पहले सरकार को सौंपा जा चुका है। इसे जल्द लागू करने की मांग की गई।

पंजाब के कुछ कॉलेजों में प्रिंसिपल तानाशाही रवैया अपनाते हुए 1925 एडेड पदों पर नियुक्त शिक्षकों के पे फिक्सेशन के केस सरकार को नहीं भेज रहे हैं, जिससे शिक्षकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे प्रिंसिपलों की ग्रांट तुरंत रोकने की मांग की गई।

25.03.2025 के पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के फैसले के अनुसार कॉलेज प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि रिटायर शिक्षकों को 20 लाख रुपये ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट बिना देरी के दिया जाए और सरकार इन कॉलेजों की ऑडिट भी करे। लेकिन रिटायर शिक्षक अपने हक के लिए वर्षों इंतजार कर रहे हैं। इस पर सख्त निर्देश जारी करने की मांग की गई।

प्रो. जसपाल सिंह ने बताया कि आरएसडी कॉलेज, फिरोजपुर के 10 शिक्षकों को पिछले 28 महीनों से वेतन नहीं मिला, जबकि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश मौजूद हैं। इस संबंध में डीएचई पंजाब ने 24.04.2025 को कॉलेज की ग्रांट रोक दी थी और 17.09.2025 को चेतावनी भी दी थी, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। इसलिए कॉलेज में तुरंत एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करने की मांग की गई।

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