Edited By Urmila,Updated: 31 Jul, 2026 12:28 PM

कनाडा के अल्बर्टा प्रांत के कैलगरी शहर में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के आवेदन खारिज होने के बाद करीब 1000 भारतीय छात्र पिछले तीन सप्ताह से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
पंजाब डेस्क : कनाडा के अल्बर्टा प्रांत के कैलगरी शहर में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के आवेदन खारिज होने के बाद करीब 1000 भारतीय छात्र पिछले तीन सप्ताह से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें लगभग 500 छात्र पंजाब से बताए जा रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि कुछ छात्रों ने 29 जुलाई से भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है। बारिश, तेज धूप और खराब मौसम के बावजूद छात्र सड़कों पर डटे हुए हैं और कनाडा सरकार से न्याय की मांग कर रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि उन्होंने कनाडा में पढ़ाई करने के लिए लाखों रुपये खर्च किए और कॉलेजों की ओर से उन्हें भरोसा दिया गया था कि कोर्स पूरा करने के बाद वे पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के पात्र होंगे। लेकिन पढ़ाई पूरी होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों के आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिए गए कि संबंधित कोर्स अब "नॉन-क्रेडिबल" माना जा रहा है। छात्रों का सवाल है कि जब दाखिले के समय यही कोर्स मान्य था, तो अब नियम बदलकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि कई परिवारों ने जमीन बेचकर या भारी कर्ज लेकर उन्हें कनाडा भेजा था। अब वर्क परमिट न मिलने से वे न तो नौकरी कर पा रहे हैं और न ही उनका भविष्य सुरक्षित नजर आ रहा है। कई छात्र मानसिक तनाव और डिप्रेशन का सामना कर रहे हैं। कुछ छात्र अपने परिवारों को सही स्थिति बताने से भी डर रहे हैं, क्योंकि उन पर लाखों रुपये के कर्ज का बोझ है।
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्क परमिट रिजेक्ट होने के बाद उनका कानूनी स्टेटस प्रभावित हो गया है। कई छात्रों के हेल्थ कार्ड रद्द हो चुके हैं, जिससे वे इलाज तक नहीं करवा पा रहे। वहीं, ड्राइविंग लाइसेंस की अवधि खत्म होने और काम करने की अनुमति न मिलने से रोजमर्रा की जिंदगी भी मुश्किल हो गई है। कई छात्रों पर अब डिपोर्टेशन का खतरा भी मंडरा रहा है।
इस बीच, कैलगरी स्थित स्थानीय गुरुद्वारा साहिब छात्रों की मदद के लिए आगे आया है। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने लंगर, राशन और जरूरतमंद छात्रों के रहने की व्यवस्था करने का भरोसा दिया है। कमेटी ने छात्रों से अपील की है कि वे हिम्मत न हारें और किसी भी तरह का गलत कदम न उठाएं।
उधर, कानूनी विशेषज्ञों ने प्रभावित छात्रों को सलाह दी है कि वे दोबारा PGWP के लिए आवेदन करने के बजाय पहले इमिग्रेशन विभाग से री-कंसिडरेशन की मांग करें और निर्धारित समय के भीतर फेडरल कोर्ट में याचिका दायर करें। साथ ही, 90 दिनों के भीतर किसी मान्यता प्राप्त पब्लिक कॉलेज में नया कोर्स लेकर अपना स्टूडेंट स्टेटस बनाए रखने का विकल्प भी सुझाया गया है।
इस पूरे विवाद का सबसे ज्यादा असर पंजाब के छात्रों पर पड़ा है। प्रभावित छात्रों में बड़ी संख्या जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, होशियारपुर और कपूरथला जैसे जिलों की है। कई परिवारों ने बच्चों को विदेश भेजने के लिए 15 से 25 लाख रुपये तक खर्च किए या कर्ज लिया था। अब इन छात्रों का भविष्य अनिश्चितता में है और वे कनाडा सरकार से अपने मामलों की दोबारा निष्पक्ष समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
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